दिल्ली वायु गुणवत्ता अपडेट 27 फरवरी 2026: राजधानी में प्रदूषण का स्तर फिलहाल 'खराब' से 'मध्यम' श्रेणी में बना हुआ है। स्थिर हवाओं और बढ़ते तापमान के कारण वायु गुणवत्ता में बड़े सुधार की उम्मीद कम है। जानें मौसम विभाग और विशेषज्ञों की राय।

राजधानी दिल्ली में फरवरी का महीना खत्म होने को है, लेकिन वायु प्रदूषण की समस्या से दिल्लीवासियों को पूरी तरह निजात नहीं मिल पाई है। मौसम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, आज दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'खराब' से 'मध्यम' श्रेणी के बीच बना रहने की संभावना है।

वायु गुणवत्ता की वर्तमान स्थिति

हाल के दिनों में दिल्ली के विभिन्न इलाकों में AQI का स्तर 200 से 300 के बीच दर्ज किया गया है, जिसे 'खराब' श्रेणी में माना जाता है। हलाकि आज 27 फरवरी को स्थिति में मामूली सुधार की उम्मीद तो है, लेकिन यह सुधार इतना बड़ा नहीं होगा कि हवा को 'साफ' कहा जा सके।

  • आनंद विहार और मुंडका: इन जैसे संवेदनशील इलाकों में AQI अब भी 250 के ऊपर बना हुआ है।
  • द्वारका और दक्षिणी दिल्ली: यहाँ वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी (100-200 के बीच) में रहने का अनुमान है।


प्रदूषण कम न होने के मुख्य कारण

आमतौर पर तापमान बढ़ने के साथ प्रदूषण के स्तर में कमी आती है, लेकिन इस बार कुछ कारकों ने हवा की गुणवत्ता को स्थिर कर दिया है:

  • स्थिर हवाएं (Calm Winds): वायुमंडल के निचले स्तर पर हवाओं की गति काफी धीमी है। जब हवा की रफ्तार कम होती है, तो प्रदूषक कण (PM2.5 और PM10) एक ही जगह जमा रह जाते हैं और बिखर नहीं पाते।
  • तापमान में बढ़ोतरी: बढ़ते तापमान के कारण धूल के कण हवा में अधिक समय तक बने रहते हैं। शुष्क मौसम की वजह से सड़कों और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल प्रदूषण के स्तर को बढ़ा रही है।
  • पश्चिमी विक्षोभ की अनुपस्थिति: फरवरी के इस अंतिम सप्ताह में किसी भी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के न होने के कारण बारिश नहीं हुई है। बारिश न होने से हवा में मौजूद जहरीले कण साफ नहीं हो पा रहे हैं।

स्वास्थ्य पर प्रभाव और विशेषज्ञों की सलाह

भले ही AQI 'बहुत खराब' श्रेणी में न हो, लेकिन 'खराब' और 'मध्यम' स्तर भी संवेदनशील समूहों के लिए चिंताजनक है।

  • सांस के मरीज: अस्थमा और फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों को सुबह की सैर के समय मास्क का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
  • बुजुर्ग और बच्चे: विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक मध्यम श्रेणी की हवा में रहने से भी गले में खराश और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।


फरवरी के अंत तक क्या है पूर्वानुमान?

सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, महीने के अंत तक प्रदूषण का स्तर इसी तरह बना रहेगा। जब तक हवा की गति में तेजी नहीं आती या हल्की बारिश नहीं होती, तब तक वायु गुणवत्ता में किसी बड़े चमत्कार की उम्मीद कम है।

दिल्ली सरकार ने निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर प्रदूषण को बढ़ने से रोका जा सके।

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