2026 की शुरुआत के साथ ही सोशल मीडिया पर फर्श के नीचे छिपे 'सीक्रेट पॉर्न रूम' का वीडियो वायरल हो रहा है। रसूखदार घरानों की लड़कियों के शामिल होने के दावों और डीपफेक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने सनसनी फैला दी है। जानिए क्या है इस वायरल वीडियो की सच्चाई और कैसे रसूखदारों के नाम इस पॉर्नोग्राफी रैकेट से जुड़ रहे हैं। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

भारत में हाल के महीनों में एमएमएस और आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने की एक ऐसी बाढ़ आई है, जिसने डिजिटल नैतिकता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 19 मिनट के एक कथित वीडियो से शुरू हुआ यह सिलसिला अब 'फर्श के नीचे छिपे गुप्त कमरों' तक जा पहुँचा है। साल 2026 की पहली सुबह जहाँ लोग नए संकल्प ले रहे थे, वहीं सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल होने लगा जिसने शासन और प्रशासन की नींद उड़ा दी है।


गुप्त तहखाना और बेनकाब होता काला साम्राज्य

वायरल हो रहे वीडियो के दृश्यों ने रोंगटे खड़े कर दिए हैं। दावे के मुताबिक, एक आलीशान इमारत के फर्श के नीचे एक गुप्त कमरा (सीक्रेट बंकर) बनाया गया था, जहाँ आधुनिक उपकरणों के साथ पॉर्नोग्राफिक वीडियो की शूटिंग की जा रही थी। पुलिस की छापेमारी के दौरान जब फर्श के गुप्त हिस्से को खोला गया, तो अंदर का नजारा देख अधिकारी भी दंग रह गए। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कई लड़कियां अपना चेहरा छिपाते हुए उस संकरे रास्ते से बाहर निकल रही हैं।

रसूखदारों के कनेक्शन का दावा

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला पहलू वे दावे हैं, जिनमें पकड़ी गई लड़कियों के तार बड़े व्यापारिक घरानों और रसूखदार राजनीतिक परिवारों से जुड़े होने की बात कही जा रही है। सोशल मीडिया पर चर्चाओं का बाजार गर्म है कि यह केवल एक साधारण रैकेट नहीं, बल्कि एक हाई-प्रोफाइल सिंडिकेट है जो डीपफेक तकनीक और रसूख के दम पर फल-फूल रहा है।

डीपफेक और 'वायरल ट्रेंड' का खतरा

पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से 19 मिनट का वीडियो, बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक कंटेंट और फिर 'पायल गेमिंग' जैसे चर्चित नाम से डीपफेक वीडियो वायरल हुए हैं, उसने समाज में एक खतरनाक प्रवृत्ति को जन्म दिया है। भारतीय युवाओं के बीच इन वीडियो को खोजने की 'होड़' तकनीकी और मानसिक स्वास्थ्य के नजरिए से चिंताजनक है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में वायरल हो रहा 'फर्श के नीचे वाला वीडियो' पुराना भी हो सकता है, जिसे महज व्यूज और सनसनी फैलाने के उद्देश्य से साझा किया जा रहा है।

कानूनी पक्ष और जांच की स्थिति

हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह छापेमारी किस शहर की पुलिस ने की है और यह वीडियो कितना प्रामाणिक है। साइबर कानून विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि इस तरह के वीडियो को साझा करना या उसे बढ़ावा देना आईटी एक्ट के तहत गंभीर अपराध है। पुलिस प्रशासन वीडियो के सोर्स (स्रोत) की जांच कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह कोई ताजी कार्रवाई है या जनता को गुमराह करने के लिए पुराना वीडियो फिर से सर्कुलेट किया गया है।

Updated On 1 Jan 2026 4:31 PM IST
Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

Next Story