छुट्टी के लिए अधिकारी के सामने पैंट उतारने को मजबूर हुआ लोको पायलट... पाइल्स का बहता खून भी नहीं पिघला पाया साहब का दिल
लखनऊ रेल मंडल में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना! पाइल्स के ऑपरेशन के बाद छुट्टी न मिलने से परेशान एक लोको पायलट को अपनी बीमारी साबित करने के लिए अधिकारी के सामने पैंट उतारनी पड़ी। खून बहते जख्म दिखाने के बावजूद रेल अधिकारी ने छुट्टी देने से किया इनकार। रेल यात्रियों की सुरक्षा और कर्मचारी की गरिमा पर उठे सवाल। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से भारतीय रेलवे की कार्यसंस्कृति और संवेदनशीलता को कटघरे में खड़ा करने वाला एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण मामला प्रकाश में आया है। लखनऊ रेल मंडल में तैनात एक लोको पायलट को अपनी बीमारी और सर्जरी के गहरे जख्मों का प्रमाण देने के लिए अपने उच्चाधिकारी के कक्ष में अपनी पैंट तक उतारनी पड़ गई। इसके बावजूद, प्रशासनिक निष्ठुरता की पराकाष्ठा यह रही कि कर्मचारी की इस चरम बेबसी को देखने के बाद भी उसे चिकित्सा अवकाश देने से साफ इनकार कर दिया गया। यह घटना अब न केवल रेल महकमे में चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि कर्मचारी संगठनों के बीच भी भारी आक्रोश पैदा कर रही है।
पूरा प्रकरण लखनऊ डिवीजन के एक लोको पायलट से जुड़ा है, जो हाल ही में बवासीर (पाइल्स) की गंभीर सर्जरी के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे। चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार ऑपरेशन के घाव अभी पूरी तरह भरे नहीं थे, जिसके चलते उन्हें ट्रेन चलाने जैसी शारीरिक और मानसिक एकाग्रता वाली ड्यूटी करने में भारी कठिनाई हो रही थी। जब लोको पायलट अपनी छुट्टी को कुछ और दिन बढ़वाने की गुहार लेकर संबंधित अधिकारी के पास पहुंचे, तो वहां का माहौल सहानुभूतिपूर्ण होने के बजाय संदेहपूर्ण हो गया। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी ने कर्मचारी की बातों पर विश्वास करने से इनकार कर दिया और बीमारी को छुट्टी लेने का महज एक बहाना करार दिया।
अधिकारी के अविश्वास और तल्ख व्यवहार से आहत होकर बेबस लोको पायलट ने अंततः एक ऐसा कदम उठाया जिसकी कल्पना किसी भी सभ्य कार्यस्थल पर नहीं की जा सकती। अपनी सत्यता सिद्ध करने के लिए कर्मचारी ने अधिकारी के सामने ही अपनी पैंट उतार दी ताकि वह ऑपरेशन के कच्चे जख्म और बहते रक्त को दिखा सके। इस विचलित करने वाले दृश्य के बावजूद अधिकारी का दिल नहीं पसीजा और उन्होंने लोको पायलट को तत्काल ड्यूटी पर लौटने का फरमान सुना दिया। यह स्थिति दर्शाती है कि सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाले रेलवे के अग्रिम पंक्ति के योद्धा किस कदर मानसिक और शारीरिक दबाव के बीच काम करने को मजबूर हैं।
अधिकारिक तौर पर इस मामले में अभी तक कोई सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कर्मचारी यूनियनों ने इसे मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन करार दिया है। जानकारों का मानना है कि एक बीमार लोको पायलट से जबरन ट्रेन चलवाना न केवल उस कर्मचारी के साथ अन्याय है, बल्कि रेल यात्रियों की सुरक्षा के साथ भी एक बड़ा खिलवाड़ है। यह घटना रेलवे प्रशासन के उस कठोर चेहरे को उजागर करती है जहां नियमों की आड़ में मानवीय संवेदनाओं की बलि चढ़ा दी जाती है। इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और आने वाले दिनों में रेलवे बोर्ड से इस पर जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
