Uttar Pradesh की मंडियों में फसलों के दामों में भारी उतार-चढ़ाव; सरसों और गेहूं ने बचाई साख
UP मंडी भाव 2026: उत्तर प्रदेश की कृषि मंडियों में फसलों की कीमतों का विस्तृत विश्लेषण। गेहूं और सरसों के दाम MSP के पार, लेकिन बाज़रा, मक्का और धान की कीमतों में भारी गिरावट। जानें 06 फरवरी 2026 तक की आवक और बाज़ार भाव की सटीक रिपोर्ट। किसानों को मोटे अनाज पर उठाना पड़ रहा है घाटा। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

UP Crops Price 2026 : उत्तर प्रदेश की कृषि मंडियों से प्राप्त फरवरी 2026 के शुरुआती आंकड़ों ने राज्य के नीति निर्माताओं और किसानों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। जहाँ एक ओर गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के करीब या उससे ऊपर कारोबार कर रही हैं, वहीं बाज़रा, मक्का और धान जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बाज़ार कीमत सरकारी दावों के विपरीत धरातल पर गिरती नज़र आ रही हैं। 06 फरवरी 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों का विश्लेषण उत्तर प्रदेश के कृषि परिदृश्य में एक गहरा असंतुलन प्रकट करता है।
बाज़ार का विश्लेषण: समर्थन मूल्य बनाम बाज़ार की कड़वी सच्चाई
उत्तर प्रदेश की विभिन्न मंडियों में 04 से 06 फरवरी के बीच हुए व्यापारिक सत्रों के दौरान कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कई प्रमुख फसलें अपने घोषित MSP को प्राप्त करने में विफल रही हैं।
- मोटे अनाज की स्थिति: बाज़रा, जिसका वर्ष 2026-27 के लिए MSP ₹2,775 निर्धारित है, मंडियों में औसतन ₹2,351 से ₹2,423 प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है। मक्का की स्थिति और भी गंभीर है, जहाँ ₹2,400 के समर्थन मूल्य के मुकाबले किसान इसे ₹1,939 से ₹1,994 में बेचने को मजबूर हैं।
- धान का संकट: राज्य के अन्नदाता के लिए धान की कीमतें भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। ₹2,369 के MSP के मुकाबले बाज़ार भाव ₹2,175 से ₹2,232 के बीच झूल रहा है।
- तिलहन में राहत: तिलहन वर्ग में सरसों ने किसानों को कुछ राहत दी है। ₹5,950 के MSP के मुकाबले सरसों का बाज़ार भाव ₹6,466 से ₹6,763 प्रति क्विंटल तक पहुँच गया है। वहीं सोयाबीन भी ₹5,400 के स्तर पर स्थिर है।
- गेहूं में मजबूती: उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल गेहूं की कीमतों में स्थिरता देखी गई है, जो ₹2,425 के MSP के सापेक्ष ₹2,458 से ₹2,490 के बीच कारोबार कर रही है।
आवक और व्यापारिक हलचल :
06 फरवरी को समाप्त हुए तीन दिवसीय सत्र में मंडियों में भारी आवक दर्ज की गई:
- गेहूं और बाज़रा: मंडियों में गेहूं की सर्वाधिक आवक (3,561 मीट्रिक टन) रही, जबकि बाज़रा की आवक भी 700 मीट्रिक टन के पार पहुँच गई।
- तिलहन: सरसों की आवक में उतार-चढ़ाव देखा गया, लेकिन कीमतों में मजबूती के कारण व्यापारी सक्रिय नज़र आए।
प्रशासनिक और आर्थिक प्रभाव :
विशेषज्ञों का कहना है कि MSP से नीचे कीमतों का गिरना बिचौलियों के बढ़ते प्रभाव या स्थानीय मांग में कमी का परिणाम हो सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह सरकारी खरीद केंद्रों (Procurement Centres) पर खरीद की प्रक्रिया को और तेज करे, ताकि उन किसानों को सुरक्षा मिल सके जिन्हें खुले बाज़ार में अपनी उपज घाटे में बेचनी पड़ रही है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
