उदयपुर से वैश्विक उड़ान: निर्यातकों के लिए राज्य सरकार ने बिछाया सुविधाओं का रेड कार्पेट
उदयपुर सहित पूरे प्रदेश के निर्यातकों के लिए राजस्थान सरकार ने 'राजस्थान निर्यात प्रोत्साहन नीति-2024' के तहत सुविधाओं का पिटारा खोल दिया है। जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र के महाप्रबंधक शैलेन्द्र शर्मा के अनुसार, सरकार विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और भारी वित्तीय सब्सिडी के माध्यम से निर्यातकों को वैश्विक मंच प्रदान कर रही है। जानिए कैसे 2029 तक प्रभावी यह नीति स्थानीय उद्योगों की सूरत बदलेगी।

उदयपुर। झीलों की नगरी अब केवल पर्यटन के मानचित्र पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार के फलक पर भी अपनी नई इबारत लिखने को तैयार है। प्रदेश की आर्थिक जड़ों को मज़बूती देने और स्थानीय उत्पादों को सात समंदर पार पहुँचाने के संकल्प के साथ राज्य सरकार ने निर्यात क्षेत्र के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की इस नई पहल के केंद्र में न केवल विश्व स्तरीय आधारभूत ढांचा है, बल्कि उन हाथों को हुनरमंद बनाना भी है जो राजस्थान की कला और कौशल को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचाते हैं। सरकार का ध्येय स्पष्ट है—प्रक्रियाओं का सरलीकरण और संसाधनों का ऐसा सुदृढ़ीकरण, जिससे एक छोटा निर्यातक भी बिना किसी बाधा के वैश्विक प्रतिस्पर्धी बन सके।
इस कवायाद को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा 'राजस्थान निर्यात प्रोत्साहन नीति-2024' का आगाज़ किया गया है। जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र के महाप्रबंधक शैलेन्द्र शर्मा ने इस योजना की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह महत्वाकांक्षी नीति 31 मार्च 2029 तक प्रभावी रहेगी। यह केवल एक कागज़ी योजना नहीं, बल्कि विनिर्माण, सेवा और व्यापार क्षेत्र में सक्रिय पूर्वस्थापित एवं नवीन निर्यातक इकाइयों के लिए प्रगति का एक नया द्वार है। सरकार ने इस नीति के माध्यम से उन वित्तीय अवरोधों को दूर करने का प्रयास किया है जो अक्सर छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमियों की राह रोकते रहे हैं।
कानूनी और आधिकारिक प्रावधानों के तहत, राज्य सरकार ने निर्यातकों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच तैयार किया है। इस नीति के अंतर्गत निर्यात दस्तावेजीकरण पर होने वाली लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक पुनर्भरण का प्रावधान किया गया है। उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए परीक्षण लागत में 75 प्रतिशत या 3 लाख रुपये तक की बड़ी राहत दी जा रही है। डिजिटल युग की मांग को देखते हुए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर लगने वाले कमीशन में भी दो वर्षों के लिए 75 प्रतिशत की छूट सुनिश्चित की गई है। साथ ही, जोखिम प्रबंधन को मज़बूत करने के लिए एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कारपोरेशन ऑफ इण्डिया को दिए जाने वाले इंश्योरेंस प्रीमियम में भी 50 प्रतिशत तक की सहायता दी जाएगी।
यह नीति राजस्थान के औद्योगिक परिदृश्य में एक युगांतरकारी बदलाव की संवाहक बनने की क्षमता रखती है। सरकार का यह कदम न केवल विदेशी मुद्रा के अर्जन को बढ़ाएगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर भी सृजित करेगा। उदयपुर जैसे व्यापारिक केंद्रों से होने वाला निर्यात अब न केवल सुगम होगा, बल्कि राजस्थान की उद्यमिता को दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक मंचों पर एक विशिष्ट और गौरवशाली पहचान भी दिलाएगा।

Pratahkal Bureau
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