उदयपुर जिला कलक्टर नमित मेहता ने 'पंच गौरव' कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए महुआ, सीताफल, मार्बल, तैराकी और झीलों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के निर्देश दिए। बैठक में 15 फरवरी से पूर्व भव्य मार्बल-ग्रेनाइट फेयर के आयोजन और खेलगांव तरणताल को ऑल वेदर बनाने जैसी प्रमुख योजनाओं पर चर्चा हुई, जिसका उद्देश्य उदयपुर की पहचान को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाई देना है।

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को आर्थिक सशक्तिकरण का आधार बनाने के उद्देश्य से जिला कलक्टर नमित मेहता ने एक दूरगामी विजन प्रस्तुत किया है। शुक्रवार शाम कलेक्ट्रेट मिनी सभागार में आयोजित 'पंच गौरव' कार्यक्रम की समीक्षा बैठक के दौरान कलक्टर मेहता ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना का मुख्य ध्येय केवल प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था और आमजन के जीवन स्तर में सुधार के रूप में दिखना चाहिए। उदयपुर के विशिष्ट उत्पादों—महुआ, सीताफल, मार्बल, तैराकी और यहां की विश्वप्रसिद्ध झीलों को केंद्र में रखकर तैयार की गई यह कार्ययोजना जिले के विकास की नई पटकथा लिखने को तैयार है।

बैठक के दौरान कलक्टर नमित मेहता ने एक-एक कर सभी पांच स्तंभों की प्रगति जांची। पंच गौरव के नोडल अधिकारी और सांख्यिकी विभाग के संयुक्त निदेशक पुनीत शर्मा ने बताया कि इस महात्वाकांक्षी कार्यक्रम के तहत अब तक 2610.44 लाख रुपये के कार्यों की स्वीकृति जारी की जा चुकी है, जिनमें से 636.97 लाख रुपये के कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए गए हैं। खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए महाराणा प्रताप खेलगांव के तरणताल को 'ऑल वेदर' बनाने की दिशा में उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) द्वारा 650 लाख रुपये के टेंडर प्रक्रिया में हैं। कलक्टर ने जिला खेल अधिकारी और यूडीए सचिव हेमेंद्र नागर को निर्देश दिए कि खेल बजट का सदुपयोग करते हुए ब्लॉक स्तर पर तैराकी स्पर्धाएं आयोजित कर ग्रामीण प्रतिभाओं की खोज की जाए।

उदयपुर के औद्योगिक गौरव, मार्बल और ग्रेनाइट को वैश्विक मंच देने के लिए जिला कलक्टर ने 15 फरवरी से पूर्व शहर में एक भव्य 'मार्बल-ग्रेनाइट फेयर' आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक शैलेंद्र शर्मा ने बताया कि 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' योजना के तहत पहले ही कई इकाइयों को सहायता प्रदान की जा रही है। वहीं, कृषि और वन संपदा के क्षेत्र में उप निदेशक उद्यान कैलाशचंद्र शर्मा और राजीविंका के जिला परियोजना प्रबंधक को सीताफल प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वन विभाग की ओर से सहायक वन संरक्षक सुरेखा चौधरी ने अवगत कराया कि बलीचा क्षेत्र में 20 हेक्टेयर में पौधारोपण और प्रचार गतिविधियों के लिए बजट आवंटित कर दिया गया है।

शहर के पर्यटन ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में यूडीए सचिव ने जानकारी दी कि फतहसागर झील पर फ्लोटिंग जेट फाउंटेन का कार्य पूर्ण हो चुका है और अब लाइटिंग एवं सौंदर्यीकरण का काम अंतिम चरण में है। जनमानस में इस कार्यक्रम के प्रति उत्साह जगाने के लिए कलक्टर ने गणतंत्र दिवस की झांकी में 'पंच गौरव' को प्रदर्शित करने और विद्यालयों में पोस्टर मेकिंग व सुझाव कार्यक्रमों के जरिए नई पीढ़ी को जोड़ने पर जोर दिया। उप निदेशक जनसंपर्क गौरीकान्त शर्मा को फिल्म, कॉफी टेबल बुक और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक ब्रांडिंग करने के निर्देश दिए गए। बैठक में नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना, पर्यटन उपनिदेशक शिखा सक्सेना और सूचना प्रौद्योगिकी संयुक्त निदेशक पूजा साहू सहित कई उच्चाधिकारी उपस्थित रहे, जिन्हें आगामी वर्ष 2026-27 की अग्रिम कार्ययोजना तैयार करने का लक्ष्य दिया गया।

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