उदयपुर के रख्यावल गांव के नारायण डांगी का चयन ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी वेस्ट जोन हॉकी प्रतियोगिता भोपाल के लिए हुआ है। ऐश्वर्या कॉलेज के छात्र नारायण की इस उपलब्धि से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। इससे पहले गांव की पांच बेटियां भी राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी खेल चुकी हैं। जानिए नारायण की इस प्रेरक यात्रा और प्रतियोगिता के बारे में पूरी जानकारी।

उदयपुर। खेल जगत में मेवाड़ की धरती एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए तैयार है। उदयपुर जिले के रख्यावल गांव में इन दिनों जश्न और गौरव का माहौल है, क्योंकि गांव के होनहार खिलाड़ी नारायण लाल डांगी उर्फ गणपत डांगी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। ऐश्वर्या कॉलेज ऑफ एजुकेशन संस्थान, उदयपुर के छात्र नारायण का चयन प्रतिष्ठित 'ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी वेस्ट जोन हॉकी पुरुष प्रतियोगिता' के लिए हुआ है। यह उपलब्धि न केवल नारायण के कड़े परिश्रम का परिणाम है, बल्कि रख्यावल गांव के खेल इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित एल. एन. सी. टी. यूनिवर्सिटी में आगामी 12 जनवरी 2026 से 17 जनवरी 2026 तक इस खेल महाकुंभ का आयोजन किया जाएगा। इस खबर के प्राप्त होते ही पूरे क्षेत्र में हर्ष की लहर दौड़ गई है। रख्यावल के पूर्व नेशनल हॉकी खिलाड़ी जगपाल सिंह बगावत ने इस अवसर पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि नारायण की यह सफलता युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का एक जीवंत स्रोत है। उन्होंने युवा खिलाड़ी के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास जताया कि नारायण अपनी स्टिक के जादू से भोपाल के मैदान पर विजय पताका फहराएंगे।

अपनी इस ऐतिहासिक यात्रा को गति देने के लिए नारायण डांगी 9 जनवरी को उदयपुर से भोपाल के लिए प्रस्थान करेंगे। यह चयन केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उस अनुशासन और समर्पण का प्रमाण है जो नारायण ने वर्षों से खेल के प्रति दिखाया है। उल्लेखनीय है कि रख्यावल गांव धीरे-धीरे राजस्थान की 'हॉकी नर्सरी' के रूप में उभर रहा है। नारायण से पूर्व भी इस छोटे से गांव की पांच बेटियों—रविना, योगिता, बेनकी, साक्षी और संगीता—ने पुणे में आयोजित ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी वेस्ट जोन हॉकी महिला प्रतियोगिता में अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर गांव का नाम रोशन किया है।

नारायण की इस सफलता ने कॉलेज के शिक्षकों, परिजनों और पूरे खेल समुदाय को गौरवान्वित किया है। यह स्पष्ट है कि उचित प्रशिक्षण और संघर्ष के बल पर ग्रामीण अंचल की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय फलक पर चमक सकती हैं। नारायण डांगी की यह उपलब्धि न केवल खेल के प्रति सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देगी, बल्कि भारतीय हॉकी के भविष्य को संवारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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