उदयपुर के मोड़ी में सरकारी तंत्र की अनदेखी की भेंट चढ़ा पटवार मंडल भवन, खंडहर में तब्दील हुई राजस्व विभाग की संपत्ति
उदयपुर के मोड़ी में राजस्व विभाग का पटवार मंडल भवन प्रशासनिक अनदेखी के कारण जर्जर हो चुका है। देखरेख के अभाव में यहाँ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है और सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों ने भवन की मरम्मत और सुरक्षा की मांग की है ताकि किसी बड़ी दुर्घटना को टाला जा सके। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

उदयपुर। जिले के मोड़ी क्षेत्र में सरकारी संपत्तियों के रखरखाव को लेकर प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़े सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। यहाँ स्थित राजस्व विभाग का पटवार मंडल भवन आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। रख-रखाव के अभाव और लंबे समय से जारी विभागीय उपेक्षा ने इस सरकारी इमारत को एक जर्जर खंडहर में तब्दील कर दिया है। यह भवन अब न केवल सरकारी उदासीनता का प्रतीक बन चुका है, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए एक संभावित खतरे के केंद्र के रूप में भी उभर रहा है।
भवन की स्थिति वर्तमान में इतनी भयावह हो चुकी है कि इसकी दरकती दीवारें और कमजोर ढांचा किसी भी बड़े हादसे को निमंत्रण दे रहा है। ग्रामीणों की मानें तो इस परिसर की सुध लेने वाला कोई नहीं है, जिसके चलते यहाँ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। इस सरकारी परिसर की गरिमा को तार-तार करते हुए यहाँ नशीली दवाओं की खाली शीशियां और गंदगी का अंबार स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। सुरक्षा और देखरेख के अभाव का आलम यह है कि अराजक तत्व भवन के दरवाजे तक उखाड़ ले गए हैं, और जो किवाड़ शेष बचे हैं, वे भी दीमक और मौसम की मार झेलकर पूरी तरह गल चुके हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि विभाग की निरंतर अनदेखी के कारण कतिपय लोग इस सार्वजनिक संपत्ति को जानबूझकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उचित निगरानी न होने से यह स्थान अब कामकाज के बजाय अनैतिक गतिविधियों का अड्डा बनता जा रहा है। राजस्व कार्यों के लिए आने वाले ग्रामीणों को बैठने और अपने दस्तावेज संबंधी कार्य करवाने में भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
क्षेत्रवासियों ने सामूहिक रूप से प्रशासन से मांग की है कि इस पटवार मंडल भवन की अविलंब मरम्मत करवाई जाए और इसका रंग-रोगन करवाकर इसे सुरक्षित स्वरूप प्रदान किया जाए। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो करोड़ों की यह सरकारी संपत्ति पूरी तरह जमींदोज हो सकती है। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन और राजस्व विभाग इस गंभीर विषय पर संज्ञान लेकर मोड़ी के इस ऐतिहासिक ढांचे को बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या फिर यह भवन फाइलों में ही अपनी अंतिम सांसें गिनता रहेगा।

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