खेरोदा में उमड़ा भक्ति का सैलाब: ढोल-नगाड़ों की थाप और जयकारों के साथ नाकोड़ा पदयात्रियों का भव्य अभिनंदन
खेरोदा में नववर्ष पर नाकोड़ा भैरव पदयात्रा कर लौटे श्रद्धालुओं का ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ भव्य स्वागत किया गया। जैन समाज ने पदयात्रियों को मालाएं पहनाकर अभिनंदन किया और मंदिर में खुशहाली की कामना की। भक्ति और उत्साह से सराबोर इस आयोजन ने खेरोदा को धर्ममय बना दिया। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

खेरोदा | 02 जनवरी, 2026
मेवाड़ की धरा पर नववर्ष का आगाज़ भक्ति और उल्लास के अनूठे संगम के साथ हुआ। खेरोदा नगर में आज उस समय आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया, जब नाकोड़ा भैरव के दरबार से पदयात्रा पूर्ण कर लौटे श्रद्धालुओं का जत्था नगर की सीमा में प्रविष्ट हुआ। ढोल-नगाड़ों की गूँज, केसरिया साफे और "नाकोड़ा भैरव की जय" के गगनभेदी जयकारों ने पूरे वातावरण को धर्ममय बना दिया।
श्रद्धा और अटूट विश्वास की इस यात्रा का समापन अत्यंत भावुक और गौरवमयी रहा। जैसे ही पदयात्री खेरोदा पहुँचे, समाजजनों ने पलक-पावड़े बिछाकर उनका स्वागत किया। पुष्प वर्षा और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच श्रद्धालुओं की अगवानी की गई। जैन समाज के वरिष्ठ जनों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक यात्रियों को पुष्पमालाएं पहनाईं और ऊपरणा ओढ़ाकर उनका बहुमान किया। भक्ति के इस उल्लास ने कड़ाके की ठंड में भी श्रद्धालुओं के जोश को कम नहीं होने दिया।
स्वागत के इस भव्य क्रम के पश्चात, एक विशाल शोभायात्रा के रूप में सभी पदयात्रियों को स्थानीय जैन मंदिर ले जाया गया। मंदिर परिसर में पहुँचकर श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए और क्षेत्र की खुशहाली व सुख-समृद्धि की कामना की। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक एकजुटता का परिचय दिया, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और कठिन साधना के प्रति प्रेरित भी किया। समूचे नगर में इस पदयात्रा और भव्य स्वागत समारोह की चर्चा रही, जिसने नववर्ष के प्रथम सप्ताह को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया है।

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