सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख; NCERT की किताब से 'भ्रष्टाचार' वाला पाठ गायब, प्रतियां जब्त!
सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की कक्षा 8 की किताब से 'न्यायिक भ्रष्टाचार' का पाठ हटाने और प्रतियों को जब्त करने का सख्त आदेश दिया है। जानें क्या था पूरा विवाद।

NCERT textbook controversy
NCERT Class 8 Controversy : भारतीय न्यायपालिका और शिक्षा व्यवस्था के बीच एक अभूतपूर्व टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की एनसीईआरटी (NCERT) की पाठ्यपुस्तक के एक विवादास्पद अध्याय पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 'एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, वॉल्यूम II' (Exploring Society: India and Beyond, Vol II) नामक पुस्तक से 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' (Corruption in the Judiciary) शीर्षक वाले पाठ को तत्काल हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी ने न केवल शिक्षा जगत, बल्कि प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब 24 फरवरी, 2026 को जारी की गई इस नई पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए। अध्याय में देश की अदालतों में लंबित लगभग 4.89 करोड़ (48.9 मिलियन) मुकदमों के बोझ और जजों के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों का विस्तार से वर्णन किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस सामग्री को "गहरी साजिश" (Deep-rooted conspiracy) करार देते हुए इसकी कड़ी भर्त्सना की। अदालत का मानना है कि इस तरह की अधूरी और विवादास्पद जानकारी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करना संस्थान की गरिमा को धूमिल करने का एक प्रयास है।
अदालत के कड़े रुख को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने न केवल डिजिटल संस्करणों को हटाने का आदेश दिया है, बल्कि बाजार और स्कूलों में मौजूद सभी भौतिक प्रतियों को भी तुरंत जब्त करने का निर्देश दिया है। कानूनी पक्ष की गंभीरता को समझते हुए, एनसीईआरटी (NCERT) ने अपनी सफाई में इसे एक "अनपेक्षित त्रुटि" (Inadvertent error) करार दिया है। परिषद ने तत्काल प्रभाव से पुस्तक के वितरण को रोक दिया है और विवादित अध्याय को पूरी तरह से संशोधित करने का आश्वासन दिया है।
“हम न्यायपालिका का सम्मान करते है”
— Abhinav Mishra (@abhinav_blogger) February 27, 2026
“मैंने NCERT को कहा, किताब जल्दी हटाओ”
“मैं खेद प्रकट करना चाहता हूँ”
“जिसने भी वो चैप्टर जोड़ा, हम उसका पता कर रहे है।
कोई मुझे बताएगा, ये लोग रोज़ माफ़ी क्यों माँग रहे है। 😂🤦🏻♂️ pic.twitter.com/dNtijBx7YR
हालांकि, इस प्रतिबंध ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। आलोचकों का तर्क है कि पुस्तक में दिए गए आंकड़े हकीकत से परे नहीं हैं। रिपोर्टों के अनुसार:
- पिछले एक दशक में जजों के खिलाफ लगभग 8,600 शिकायतें दर्ज की गई हैं।
- देश की अदालतों में 4.89 करोड़ मुकदमों का बैकलॉग न्याय में देरी का एक बड़ा कारण बना हुआ है।
- पूर्व में सामने आए कई अनसुलझे विवाद और घोटाले न्यायपालिका की पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं।
अंततः, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न्यायपालिका की संप्रभुता और शैक्षणिक स्वायत्तता के बीच के बारीक संतुलन को रेखांकित करता है। यह घटना स्पष्ट करती है कि जहां एक ओर व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश है, वहीं दूसरी ओर संस्थागत साख की रक्षा के लिए उच्चतम स्तर पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। इस प्रतिबंध का दीर्घकालिक प्रभाव अब शिक्षा नीति और न्यायिक जवाबदेही की चर्चाओं में देखने को मिलेगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
