हॉर्मुज जलडमरूमध्य हुआ जाम- 70% यातायात ठप्प, जानिए भारत पर इसका कितना होगा असर।
मिडिल ईस्ट तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का 70% यातायात बंद, कच्चे तेल की कीमतें $79 प्रति बैरल के पार। जानें भारत के लिए इसका क्या मतलब है और कैसे यह ऊर्जा संकट दुनिया को प्रभावित कर रहा है।

Strait of Hormuz jammed
हॉर्मुज का संकट और ग्लोबल अर्थव्यवस्था
आज दुनिया की नजरें एक छोटे से समुद्री मार्ग पर टिकी हैं—हॉर्मुज जलडमरूमध्य। यह मार्ग दुनिया के 20% तेल व्यापार का द्वार है। लेकिन 2 मार्च, 2026 को आई खबरों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनें बढ़ा दी हैं। ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के चलते इस मार्ग से होने वाला समुद्री व्यापार लगभग 70% तक घट गया है।
क्यों है यह इतना चिंताजनक?
हॉर्मुज दुनिया की सबसे व्यस्त तेल धमनी है। हर दिन यहाँ से करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है। जब यहाँ जहाज रुकते हैं, तो इसका सीधा असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर पड़ता है। यही कारण है कि आज ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें 9% से अधिक उछलकर लगभग $79 प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं। पिछले 4 वर्षों में यह तेल की कीमतों में सबसे बड़ी एक-दिवसीय वृद्धि है।
भारत पर इसका असर: क्या सुरक्षित है हमारी ऊर्जा?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 90% आयात करता है। हमारी बड़ी आबादी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर है। अच्छी खबर यह है कि भारत ने अपनी रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Reserves) को मजबूत रखा है, जो करीब 10 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त है। हालांकि, अगर तनाव लंबा खिंचता है, तो पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन की कीमतों में इजाफा निश्चित है, जिसका असर महंगाई (Inflation) के रूप में आम आदमी पर पड़ेगा।
अभी और कितना बढ़ सकता है तनाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समुद्री मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल का स्तर भी छू सकती हैं। फिलहाल, वैश्विक नेता और ओपेक (OPEC) देश स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सैन्य तनाव में अनिश्चितता ही सबसे बड़ा जोखिम है।

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