Sam Altman की चेतावनी; 2028 के अंत तक Superintelligence पछाडेगी इंसानी दिमाग
Sam Altman की बड़ी चेतावनी: 2028 तक सुपरइंटेलिजेंस इंसानी दिमाग को पछाड़ देगा। दिल्ली में चीन की AI प्रगति और परमाणु स्तर के कड़े नियमों की मांग पर दी जोर।

Sam Altman
Sam Altman India AI Summit 2026 : दुनिया इस वक्त एक ऐसे तकनीकी मोड़ पर खड़ी है जहाँ कल्पना और हकीकत के बीच की लकीर धुंधली होती जा रही है। नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के मंच से ओपनएआई (OpenAI) के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने एक ऐसी भविष्यवाणी की है जिसने वैश्विक गलियारों में हलचल मचा दी है। ऑल्टमैन ने आगाह किया है कि वह दौर अब दूर नहीं जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई, इंसानी समझ और क्षमता को पीछे छोड़ देगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'सुपरइंटेलिजेंस' (Superintelligence) का उदय उम्मीद से कहीं पहले हो सकता है, जो संभवतः साल 2028 के अंत तक मानव मस्तिष्क की सीमाओं को पार कर जाएगा।
चीन की छलांग और वैश्विक शक्ति संतुलन :
समिट के दौरान ऑल्टमैन का मुख्य जोर चीन की 'अविश्वसनीय रूप से तेज' प्रगति पर था। उन्होंने रेखांकित किया कि चीन एआई की सीमाओं (Frontier) को छूने के लिए जिस गति से आगे बढ़ रहा है, वह चौंकाने वाला है। यह केवल एक तकनीकी दौड़ नहीं, बल्कि एक नया भू-राजनीतिक शक्ति केंद्र बनने की प्रतिस्पर्धा है। ऑल्टमैन ने चिंता जताई कि यदि सुपरइंटेलिजेंस की इस शक्ति पर किसी एक राष्ट्र या निजी कंपनी का एकाधिकार हो गया, तो यह वैश्विक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
परमाणु मानकों पर नियमन की मांग :
सैम ऑल्टमैन ने एआई के इस अदम्य विस्तार को नियंत्रित करने के लिए कड़े वैश्विक नियमों की वकालत की। उन्होंने इसका मॉडल 'परमाणु ऊर्जा' के अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण (Nuclear Oversight) जैसा रखने का सुझाव दिया। उनके अनुसार, जिस तरह परमाणु शक्ति के विनाशकारी पहलुओं को रोकने के लिए वैश्विक संधियाँ और नियामक संस्थाएं काम करती हैं, ठीक वैसी ही व्यवस्था एआई के लिए भी अनिवार्य है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई का विकास और तैनाती न्यायसंगत हो और यह मानवता के नियंत्रण से बाहर न जाए।
#WATCH | Delhi | PM Narendra Modi holds a bilateral meeting with the CEO of OpenAI, Sam Altman.
— ANI (@ANI) February 20, 2026
(Source: DD) pic.twitter.com/POk8Khx3mB
समिट में उभरती प्रतिक्रियाएं और कानूनी दृष्टिकोण :
- यूरोपीय संघ (EU) का रुख: यूरोपीय अधिकारियों ने अपने 'एआई एक्ट' (AI Act) को एक वैश्विक ब्लूप्रिंट के रूप में पेश किया, जिसे वे सुरक्षित तकनीक की दिशा में पहला ठोस कदम मानते हैं।
- विशेषज्ञों का संदेह: तकनीकी विशेषज्ञों और संशयवादियों के एक समूह ने ऑल्टमैन की समयसीमा (2028) पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, यह एआई के इर्द-गिर्द 'हाइप' बनाने की एक कोशिश भी हो सकती है।
- भारत की भूमिका: इस पूरे परिदृश्य में भारत की भूमिका एक उभरते हुए वैश्विक एआई हब के रूप में देखी जा रही है, जहाँ नवाचार और नियमन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश जारी है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
