PM स्वनिधि योजना 2026: रेहड़ी-पटरी वालों को मिल रहा है ₹50,000 तक का बिना गारंटी लोन और 7% ब्याज सब्सिडी। जानें पात्रता, कैशबैक लाभ और आवेदन की पूरी प्रक्रिया।

PM SVANidhi Scheme Details : आधुनिक भारत के शहरी परिदृश्य में 'रेहड़ी-पटरी वाले' (Street Vendors) न केवल अर्थव्यवस्था का एक अनिवार्य हिस्सा हैं, बल्कि वे आम नागरिक की दैनिक जरूरतों की पहली कड़ी भी हैं। कोविड-19 की वैश्विक महामारी के दौरान जब इन छोटे व्यापारियों की आजीविका पर संकट के बादल मंडराए, तब भारत सरकार के आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने 1 जून 2020 को 'PM स्वनिधि' (PM SVANidhi) योजना का शंखनाद किया। यह योजना मात्र एक ऋण कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के उन लाखों 'अदृश्य उद्यमियों' के लिए आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत है, जो फल, सब्जी, चाय-पकौड़े और हस्तशिल्प जैसे सामानों के जरिए शहरों को जीवंत रखते हैं।

PM स्वनिधि योजना की सबसे क्रांतिकारी विशेषता इसका 'कोलेटरल-मुक्त' होना है। यानी, एक रेहड़ी-पटरी वाले को अपना व्यापार फिर से शुरू करने या उसे बढ़ाने के लिए किसी भी प्रकार की संपत्ति गिरवी रखने या गारंटी देने की आवश्यकता नहीं है। इस सूक्ष्म-ऋण (Micro-credit) योजना को तीन प्रगतिशील चरणों में तैयार किया गया है। पहले चरण में ₹10,000 की कार्यशील पूंजी प्रदान की जाती है। यदि विक्रेता इस ऋण का समय पर पुनर्भुगतान करता है, तो वह दूसरे चरण में ₹20,000 और अंततः तीसरे चरण में ₹50,000 तक के ऋण का पात्र हो जाता है। यह क्रमिक विकास न केवल विक्रेताओं को वित्तीय अनुशासन सिखाता है, बल्कि उन्हें बैंकिंग प्रणाली की मुख्यधारा से भी जोड़ता है।

वित्तीय लाभ के साथ-साथ, सरकार ने इस योजना में 'डिजिटल इंडिया' के विजन को भी समाहित किया है। योजना के अंतर्गत डिजिटल लेनदेन करने वाले विक्रेताओं को ₹100 प्रति माह तक का कैशबैक दिया जाता है, जो उनकी डिजिटल उपस्थिति को प्रोत्साहित करता है। इसके अलावा, समय पर या जल्दी ऋण चुकाने वाले लाभार्थियों के बैंक खातों में 7% की वार्षिक ब्याज सब्सिडी सीधे हस्तांतरित (DBT) की जाती है। योजना की पात्रता उन सभी विक्रेताओं के लिए खुली है जिनके पास शहरी स्थानीय निकायों (ULB) द्वारा जारी वेंडिंग सर्टिफिकेट या पहचान पत्र है। जो विक्रेता सर्वेक्षण से छूट गए हैं, वे भी टाउन वेंडिंग कमेटी से 'सिफारिश पत्र' (LoR) प्राप्त कर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

योजना का ढांचा और लाभ निम्नलिखित बिंदुओं में निहित हैं :

  • ऋण की श्रेणी: ₹10,000 (प्रथम), ₹20,000 (द्वितीय) और ₹50,000 (तृतीय ऋण)।
  • ब्याज में छूट: समय पर भुगतान करने पर 7% की महत्वपूर्ण सब्सिडी।
  • डिजिटल प्रोत्साहन: प्रति वर्ष ₹1200 तक का कैशबैक रिवॉर्ड।
  • शून्य शुल्क: आवेदन के लिए कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं ली जाती।

आज यह योजना राष्ट्रीय स्तर पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रभावी ढंग से लागू है। PM स्वनिधि पोर्टल के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया को अत्यंत सरल और पारदर्शी बनाया गया है, जहाँ आधार कार्ड और पहचान पत्र जैसे बुनियादी दस्तावेजों के साथ लॉगिन कर पंजीकरण किया जा सकता है। निष्कर्षतः, PM स्वनिधि योजना ने न केवल स्ट्रीट वेंडर्स को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराया है, बल्कि उन्हें एक औपचारिक पहचान देकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाया है। यह योजना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब शासन की संवेदनशीलता और तकनीक का मेल होता है, तो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का जीवन भी सम्मानजनक बन जाता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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