सरकारी फाइलों की धूल में खोई 'पिता की कुर्बानी'; शहीद के शहादत के 10 महीने बाद भी पाई-पाई को मोहताज
पहलगाम आतंकी हमले में शहीद संतोष जगदाले का परिवार 10 महीने बाद भी सरकारी नौकरी के वादे का इंतजार कर रहा है। जमा-पूंजी खत्म होने और आर्थिक तंगी के बीच बेटी असावरी जगदाले ने अब गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने उठाया मामला। पढ़ें, वादों और हकीकत के बीच संघर्ष कर रहे एक पीड़ित परिवार की मार्मिक दास्तां।

Asawari Jagdale government job delay : आतंकवाद की आग जब किसी घर के चिराग को बुझाती है, तो पीछे छूट जाता है सन्नाटा और अंतहीन संघर्ष। पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में संतोष जगदाले की हत्या ने उनके परिवार को न केवल भावनात्मक रूप से तोड़ा, बल्कि आर्थिक रूप से भी हाशिए पर ला खड़ा किया है। आज 10 महीने बीत जाने के बाद भी, शहीद की बेटी असावरी जगदाले राज्य सरकार के उन वादों की फाइलों में उलझी हुई हैं, जिन्हें खुद मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से दोहराया था। परिवार की हालत अब ऐसी है कि वे अपनी अंतिम जमा-पूंजी के सहारे दिन काट रहे हैं, जबकि सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रही है।
वादों का शोर और हकीकत की खामोशी :
संतोष जगदाले की हत्या के बाद राज्य के शीर्ष नेतृत्व ने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद और असावरी को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया था। हालांकि, समय बीतने के साथ यह आश्वासन केवल राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह गया। असावरी ने भारी मन से बताया कि अपनी मां की देखभाल के लिए उन्हें निजी क्षेत्र की नौकरी छोड़नी पड़ी। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री ने खुद नौकरी की घोषणा की थी, लेकिन आज तक लिखित में कुछ भी नहीं मिला। प्रशासन हमें मंत्रालय के चक्कर लगाने को कहता है, पर कोई ठोस प्रगति नहीं दिखती। ऐसा लगता है जैसे घटना से ध्यान हटते ही हम सरकार के लिए महत्वहीन हो गए।"
असावरी की शैक्षणिक योग्यता द्वितीय श्रेणी के प्रशासनिक अधिकारी पद के लिए उपयुक्त है। पुणे नगर निगम (PMC) ने भी अगस्त में राज्य सरकार को उनकी नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन वह प्रस्ताव आज भी सरकारी टेबल पर धूल फांक रहा है। परिवार का कहना है कि वे अब तक अपनी बचत से गुजारा कर रहे हैं, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चल सकती।
हस्तक्षेप की मांग : राज्यसभा से गृह मंत्रालय तक पहुँचा मामला
राज्य सरकार की उदासीनता से तंग आकर जगदाले परिवार ने अब केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया है। असावरी ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र लिखा, लेकिन वहां से भी कोई प्रत्युत्तर नहीं मिला। अंततः, कोथरूड की निवासी और राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने इस संवेदनशील मामले को अपने हाथों में लिया है। कुलकर्णी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर उन्हें जगदाले परिवार की व्यथा से अवगत कराया।
पहलगाम हल्ल्यामध्ये पुणे येथील रहिवासी संतोष जगदाळे यांचा मृत्यू झाला होता. या घटनेनंतर त्यांची कन्या आसावरी यांना शासकीय नोकरी देण्याची घोषणा करण्यात आली होती. स्वतः मुख्यमंत्री यासाठी अनुकूल होते. तरीही आसावरी यांना अद्यापही नोकरी मिळत नाही, याचे सखेद आश्चर्य वाटते. आसावरी या…
— Supriya Sule (@supriya_sule) February 16, 2026
मामले के प्रमुख कानूनी और आधिकारिक बिंदु :
- अनुपस्थित नियुक्ति : पुणे नगर निगम ने अगस्त 2023 में ही राज्य सरकार से असावरी की नियुक्ति के लिए अनुमति मांगी थी, जो अब तक लंबित है।
- सांसद का हस्तक्षेप : मेधा कुलकर्णी ने गृह मंत्री से मांग की है कि सरकार की प्रतिबद्धता का सम्मान करते हुए असावरी को या तो पुणे नगर निगम या राज्य प्रशासन में तत्काल पद दिया जाए।
- संवेदनशील श्रेणी : यह मामला 'आतंकी हमले के पीड़ितों के लिए पुनर्वास नीति' के तहत आता है, जिसमें अनुकंपा नियुक्तियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
