इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में गलगोटियास यूनिवर्सिटी का 'ओरियन' रोबोडॉग विवादों में घिरा। क्या यह स्वदेशी आविष्कार है या चीन से खरीदा गया रोबोट? रजिस्ट्रार की सफाई और राहुल गांधी के आरोपों के बीच जानें 'डेवलप' बनाम 'डेवलपमेंट' के इस हाई-टेक ड्रामे की पूरी हकीकत। भारत मंडपम से विशेष रिपोर्ट।

India AI Impact Summit 2026 : भारत मंडपम के भव्य गलियारों में जहाँ दुनिया भर के दिग्गज 'IndiaAI' मिशन के तहत मानवता के भविष्य पर चर्चा कर रहे हैं, वहीं एक 'रोबोटिक डॉग' ने भारतीय शिक्षा जगत और राजनीति में हलचल मचा दी है। इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में गलगोटियास यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर प्रदर्शित एक क्वाड्रूपेड रोबोट (चार पैरों वाला रोबोट) विवादों के केंद्र में आ गया है। जिसे 'स्वदेशी नवाचार' समझकर लोग सराह रहे थे, उस पर अचानक 'विदेशी उत्पाद' होने का ठप्पा लग गया, जिसके बाद समिट की गरिमा और यूनिवर्सिटी की साख पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

विवाद की जड़ : 'डेवलप' और 'डेवलपमेंट' के बीच फंसी सच्चाई

इस पूरे ड्रामे की शुरुआत एक वायरल वीडियो से हुई, जिसमें यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने 'ओरियन' नामक इस रोबोडॉग को पेश करते हुए इसे यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का गौरवशाली उत्पाद बताया। हालांकि, सोशल मीडिया पर टेक प्रेमियों ने इसे तुरंत चीन की मशहूर कंपनी Unitree के Go2 मॉडल के रूप में पहचान लिया। यह रोबोट बाजार में लगभग 2.5 लाख रुपये में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध है। विवाद तब और गहरा गया जब 'मेक इन इंडिया' की थीम वाले इस वैश्विक आयोजन में एक विदेशी उत्पाद को घरेलू आविष्कार के रूप में पेश करने के आरोप लगने लगे।

गलगोटियास यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार नितिन कुमार गौड़ ने इस पर सफाई देते हुए इसे 'भाषाई भूल' करार दिया है। उन्होंने एएनआई से बातचीत में स्वीकार किया कि रोबोट को खुद विकसित नहीं किया गया था, बल्कि इसे छात्रों के शोध (Research) के लिए खरीदा गया था। गौड़ का कहना है कि 'डेवलप' (विकसित करना) और 'डेवलपमेंट' (विकास पर काम करना) शब्दों के चुनाव में प्रोफेसर से चूक हुई और इसे इन-हाउस इनोवेशन के रूप में पेश करने का कोई इरादा नहीं था।



घटनाक्रम और तकनीकी तुलना : एक नजर में

यूनिवर्सिटी के दावों और हकीकत के बीच के अंतर को निम्नलिखित तालिका और चार्ट के माध्यम से समझा जा सकता है:

विवरण

यूनिवर्सिटी का प्रारंभिक दावा

आधिकारिक सफाई और वास्तविकता

नाम

ओरियन (Orion)

Unitree Go2 (चीनी कमर्शियल मॉडल)

स्रोत

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उत्पाद

रिसर्च के लिए खरीदा गया टूल

अनुमानित लागत

नवाचार (In-house)

लगभग 2.5 लाख रुपये

विवाद का केंद्र

स्वदेशी आविष्कार का दावा

'डेवलप' बनाम 'डेवलपमेंट' शब्द का भ्रम

जैसा कि ऊपर दिए गए चार्ट में समिट में शामिल होने वाले नवाचारों की श्रेणियों को दर्शाया गया है, गलगोटियास का स्टॉल 'रिसर्च टूल्स' की जगह 'इन-हाउस प्रोडक्ट्स' की श्रेणी में चर्चा में आने के कारण जांच के दायरे में आया।



राजनीतिक मोड़ और प्रशासनिक कार्रवाई :

यह मामला केवल तकनीकी बहस तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस घटना को साझा करते हुए सरकार के 'स्वदेशी दावों' को महज 'प्रचार' (Propaganda) करार दिया। विपक्ष के कड़े रुख के बाद सरकार के आधिकारिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ गई। सूत्रों के हवाले से खबर आई कि यूनिवर्सिटी को स्टॉल खाली करने और समिट छोड़ने का निर्देश दिया गया है।



हालांकि, रजिस्ट्रार नितिन कुमार गौड़ ने इन आदेशों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्हें अब तक कोई आधिकारिक संचार (Official Communication) नहीं मिला है। उन्होंने इसे यूनिवर्सिटी के खिलाफ एक सुनियोजित 'प्रोपगैंडा कैंपेन' बताया है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story