बंगाल की राजनीति के एक युग का अंत; TMC संस्थापक मुकुल रॉय का निधन
पूर्व रेल मंत्री और टीएमसी संस्थापक मुकुल रॉय का 71 वर्ष की आयु में निधन। कोलकाता में ली अंतिम सांस। जानें उनके राजनीतिक सफर, दलबदल और विवादों की पूरी कहानी।

Mukul Roy Death
Mukul Roy death news : पश्चिम बंगाल की राजनीति के शिखर पुरुष और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के आधार स्तंभ रहे मुकुल रॉय ने रविवार तड़के इस नश्वर संसार को अलविदा कह दिया। 71 वर्षीय रॉय पिछले काफी समय से विभिन्न गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। कोलकाता के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान सुबह करीब 1:30 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर से राज्य के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
TMC के शिल्पकार से केंद्र की सत्ता तक :
मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर भारतीय लोकतंत्र के सबसे दिलचस्प अध्यायों में से एक रहा है। 17 अप्रैल, 1954 को जन्मे रॉय ने अपने करियर की शुरुआत युवा कांग्रेस से की थी, जहाँ उनकी मुलाकात ममता बनर्जी से हुई। यह घनिष्ठता 1998 में तब और गहरी हुई जब उन्होंने बनर्जी के साथ मिलकर कांग्रेस से अलग होकर टीएमसी की नींव रखी। पार्टी के शुरुआती दिनों में रॉय इसके प्रमुख रणनीतिकार और संगठनकर्ता बनकर उभरे।
उनकी संगठनात्मक क्षमता का ही परिणाम था कि वे न केवल राज्यसभा पहुंचे, बल्कि केंद्र की यूपीए-2 सरकार में जहाजरानी राज्य मंत्री और बाद में रेल मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हुए। हालांकि, रेल मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल विवादों और नाटकीय मोड़ों से भरा रहा, विशेषकर 2011 की रेल दुर्घटना के समय प्रधानमंत्री के निर्देशों की कथित अनदेखी और बाद में रेल किराया वृद्धि को वापस लेने के उनके फैसलों ने उन्हें राष्ट्रीय सुर्खियों में रखा।
मतभेद, दलबदल और कानूनी विवाद :
साल 2015 के बाद मुकुल रॉय के राजनीतिक जीवन में उतार-चढ़ाव का दौर शुरू हुआ। सारदा चिट फंड और नारदा स्टिंग ऑपरेशन जैसे मामलों में नाम आने के बाद उनके और टीएमसी नेतृत्व के बीच दूरियां बढ़ती गईं। 2017 में उन्होंने टीएमसी का दामन छोड़ भाजपा का हाथ थाम लिया। भाजपा में रहते हुए उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई।
मुकुल रॉय के करियर का सबसे विवादास्पद मोड़ 2021 के चुनाव परिणाम के बाद आया, जब वे वापस टीएमसी में लौट गए। हालांकि, तकनीकी और कानूनी रूप से उनकी पहचान को लेकर लंबी खींचतान चली।
मुकुल रॉय के राजनीतिक जीवन के प्रमुख पड़ाव | विवरण |
1998 | तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संस्थापक सदस्य बने। |
2012 | केंद्र सरकार में रेल मंत्री के रूप में शपथ ली। |
2017 | TMC से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए। |
2021 | विधानसभा चुनाव जीता और पुनः टीएमसी में वापसी की। |
कानूनी मोर्चे पर अंतिम निर्णय :
मुकुल रॉय की विधायक सदस्यता और दलबदल का मामला लंबे समय तक कानूनी पेचीदगियों में फंसा रहा। जनवरी 2022 में उनके वकीलों ने तर्क दिया था कि उन्होंने आधिकारिक तौर पर टीएमसी में प्रवेश नहीं किया है, जिसके आधार पर विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी सदस्यता बरकरार रखी थी। हालांकि, नवंबर 2025 में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दलबदल के आधार पर उनकी विधायक सदस्यता रद्द कर दी थी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
