पुणे में पुरंदर एयरपोर्ट का काम 85% पूरा ; जानिए कब शुरू महाराष्ट्र का होगा नया इंटरनेशनल एयरपोर्ट
पुणे जिले के पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परियोजना में बड़ा अपडेट सामने आया है, जहाँ भूमि अधिग्रहण 85 प्रतिशत से अधिक पहुँच चुका है। लगभग 2,430 एकड़ भूमि अधिग्रहित हो चुकी है और पुनर्वास प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। यह परियोजना पुणे की विमानन क्षमता को नया आयाम देने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है।

पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परियोजना के भूमि अधिग्रहण में आई तेजी
पुणे जिले में प्रस्तावित पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की परियोजना ने अब एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर लिया है, जहाँ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ते हुए 85 प्रतिशत से अधिक तक पहुँच चुकी है। ताज़ा परियोजना अपडेट के अनुसार लगभग 2,430 एकड़ भूमि का अधिग्रहण पहले ही पूरा किया जा चुका है, जिससे इस महत्वाकांक्षी विमानन परियोजना के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है।
यह प्रस्तावित हवाई अड्डा, जिसे आधिकारिक रूप से छत्रपति संभाजी राजे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने की योजना है, पुणे जिले के पुरंदर तालुका में सासवड़ और जेजुरी के निकट स्थापित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य पुणे के वर्तमान लोहेगांव हवाई अड्डे पर बढ़ते दबाव को कम करना और भविष्य की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की आवश्यकताओं को पूरा करना है। यह एक ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होगा, जिसके लिए लगभग 2,832 हेक्टेयर यानी करीब 7,000 एकड़ भूमि की आवश्यकता निर्धारित की गई है।
यह परियोजना पुरंदर क्षेत्र के सात गांवों- कुंभारवलण, एकहतपुर, परगांव मेमाने, वणपुरी, उडाचीवाड़ी, खानवाड़ी और मुंजवाड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों में फैली हुई है। यह स्थल पुणे शहर से लगभग 40 से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे यह भविष्य में शहर के प्रमुख विमानन केंद्र के रूप में विकसित होने की क्षमता रखता है।
वर्तमान स्थिति के अनुसार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया 50 प्रतिशत से 85 प्रतिशत के बीच विभिन्न चरणों में दर्ज की गई है, जबकि 2026 में इस प्रक्रिया में उल्लेखनीय तेजी देखी गई है। प्रशासनिक रिपोर्टों के अनुसार अब तक 1,500 से 2,400 एकड़ भूमि किसानों की सहमति या अधिग्रहण के माध्यम से प्राप्त की जा चुकी है। इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण विकास यह भी रहा है कि जिला प्रशासन ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए लगभग 253 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जो परियोजना के अंतिम चरणों की तैयारी का संकेत देती है।
भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार द्वारा प्रति एकड़ लगभग 1.61 करोड़ रुपये का मुआवजा निर्धारित किया गया है। इस परियोजना की कुल भूमि अधिग्रहण लागत लगभग 3,500 से 6,000 करोड़ रुपये के बीच अनुमानित की जा रही है। इस वित्तीय ढांचे में MIDC को प्रमुख एजेंसी की भूमिका सौंपी गई है, जबकि CIDCO, PMRDA और MADC भी परियोजना के क्रियान्वयन में शामिल हैं। तेज़ी से अधिग्रहण सुनिश्चित करने के लिए HUDCO सहित विभिन्न वित्तीय संस्थानों से ऋण सहायता भी स्वीकृत की गई है। परियोजना के प्रशासनिक ढांचे को एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से संचालित किया जा रहा है, जिसमें CIDCO की 51 प्रतिशत, MADC की 19 प्रतिशत तथा MIDC और PMRDA की संयुक्त हिस्सेदारी शामिल है। यह संरचना परियोजना के समन्वित विकास और प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
योजना के तहत इस हवाई अड्डे में दो समानांतर रनवे बनाए जाने का प्रस्ताव है, जिनकी लंबाई लगभग चार किलोमीटर होगी। इसके साथ ही एक आधुनिक कार्गो टर्मिनल, यात्री टर्मिनल और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सुविधा के लिए समर्पित बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा। यह परियोजना भविष्य में पुणे और पश्चिमी महाराष्ट्र की बढ़ती विमानन आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है।
इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2016 में स्थल चयन के साथ हुई थी, जिसके बाद 2020 से 2023 के बीच भूमि अधिग्रहण में कई बाधाएँ और विरोध देखने को मिले। वर्ष 2025 में प्रक्रिया को पुनः गति दी गई और 2026 में इसमें उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। सरकार का लक्ष्य जून 2026 तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लगभग पूर्ण करने का है, जिसके बाद परियोजना निर्माण चरण में प्रवेश करेगी।
हालांकि परियोजना के सामने कुछ चुनौतियाँ भी बनी हुई हैं, जिनमें भूमि अधिग्रहण की जटिल प्रक्रिया, पुनर्वास और मुआवजा संबंधी मुद्दे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष शामिल हैं। इसके बावजूद हाल के महीनों में किसानों की सहमति में वृद्धि और मुआवजा प्रक्रिया के तेज़ होने से प्रगति को गति मिली है। पूरा होने पर यह हवाई अड्डा पुणे के वर्तमान हवाई अड्डे पर दबाव को कम करेगा, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या बढ़ाएगा, रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करेगा और सासवड़-जेजुरी क्षेत्र में आर्थिक तथा औद्योगिक विकास को नई दिशा देगा। इसे महाराष्ट्र के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है, जो पश्चिमी भारत के विमानन मानचित्र को बदलने की क्षमता रखती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
