5 जनवरी 2026 को आईटी शेयरों में तेज गिरावट ने निफ्टी आईटी इंडेक्स को 2.5% तक गिरा दिया। HCLTech, Infosys और Tech Mahindra के शेयरों में भारी बिकवाली ने सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव डाला। वैश्विक व्यापार चिंताएं और तिमाही परिणामों की अनिश्चितता मुख्य कारण मानी जा रही है।

भारतीय शेयर बाजार ने 5 जनवरी 2026 को निवेशकों को निराश किया जब प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। इस गिरावट ने निफ्टी आईटी इंडेक्स को लगभग 2.5 प्रतिशत नीचे खींच दिया और हेजिंग से लेकर बड़े निवेशकों तक सभी के बीच चिंता बढ़ा दी। विशेष रूप से HCLTech और Tech Mahindra जैसे प्रमुख नामों में भारी बिकवाली दर्ज की गई, जिसने व्यापक बाजार पर भी दबाव डाला।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस कमजोरी के पीछे कई कारक काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा कारण वैश्विक व्यापार पर उठते सवाल हैं, विशेष रूप से अमेरिका की संभावित टैरिफ नीतियों की आशंका। इससे भारतीय आईटी कंपनियों की विदेशों में सेवाओं की मांग पर नकारात्मक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। निवेशक भी आगामी तिमाही के नतीजों को लेकर सतर्क दिखाई दिए, जिससे पहले से ही कमजोर बाजार भावना और बढ़ गई।

विशेष रूप से HCLTech और Infosys के शेयर लगभग 4 प्रतिशत तक गिर गए, जबकि Tech Mahindra, Wipro और TCS में भी बिकवाली देखी गई। इस गिरावट ने न केवल आईटी सेक्टर को प्रभावित किया, बल्कि सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों को भी नीचा खींचा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बिकवाली आमतौर पर अगली तिमाही के वित्तीय परिणामों से पहले होती है, जब निवेशक संभावित जोखिमों को देखते हुए सुरक्षित निवेश करना पसंद करते हैं।

आईटी शेयरों की गिरावट के मुख्य कारण-

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता: अमेरिका और यूरोप में तकनीकी निवेश में संभावित मंदी के संकेत भारतीय आईटी कंपनियों की निर्यात आय पर असर डाल सकते हैं।

कमजोर निवेशक मनोवृत्ति: बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और आगामी ईपीएस (Earnings Per Share) के बारे में असमंजस ने बिकवाली को तेज किया।

सक्रिय विदेशी निवेशकों की प्रतिक्रिया: विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) इस गिरावट में मुख्य भूमिका निभाते दिखाई दिए, जिन्होंने बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच अपने पोर्टफोलियो से हिस्सेदारी निकाली।

इस गिरावट का असर सिर्फ आईटी सेक्टर तक ही सीमित नहीं रहा। बाजार के बड़े सूचकांक भी दबाव में रहे और निवेशक अलर्ट हो गए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय निवेशकों को संयम बनाए रखना और आगामी तिमाही की रिपोर्टों का इंतजार करना चाहिए। वहीं, वित्तीय नियामक भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और संभावित बाजार अस्थिरता के खिलाफ सतर्कता बरत रहे हैं। 5 जनवरी की यह आईटी शेयरों की गिरावट केवल एक सेक्टरल घटना नहीं थी, बल्कि यह भारतीय शेयर बाजार की वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशक मनोवृत्ति का भी परिचायक है। आने वाले हफ्तों में इस गिरावट की दिशा तय करने में तिमाही परिणाम और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों का निर्णायक योगदान रहेगा।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story