युद्ध की आग में झुलसा फुटबॉल; अमेरिका में होने वाले FIFA World Cup से हट सकता है ईरान
ईरान-इजरायल तनाव और अमेरिकी बमबारी के बीच 2026 FIFA World Cup में ईरान की एंट्री पर सवाल। क्या ट्रैवल बैन से टीम बाहर हो जाएगी?

FIFA World Cup
FIFA World Cup 2026 : खेल के मैदान पर जहाँ दुनिया एकजुट होने का सपना देख रही है, वहीं मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध के बादलों ने फुटबॉल के सबसे बड़े महाकुंभ, फीफा विश्व कप 2026 पर अनिश्चितता का साया डाल दिया है। ईरान के फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष मेहदी ताज के हालिया बयान ने खेल जगत में हड़कंप मचा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की गई हालिया बमबारी के बाद अब राष्ट्रीय टीम का अमेरिका जाना और विश्व कप में हिस्सा लेना बेहद संदिग्ध नजर आ रहा है।
युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता का प्रभाव :
यह संकट उस समय गहराया है जब 2 मार्च, 2026 को लेबनान के बेरूत में भीषण इजरायली हमलों के बाद आसमान धुएं से भर गया। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद से इस्लामी गणराज्य का भविष्य अनिश्चितता के भंवर में फंसा हुआ है। क्षेत्रीय अस्थिरता के इस दौर में, रविवार को दूसरे दिन भी अमेरिका और इजरायल के हमले जारी रहे। खेल पोर्टल 'वर्ज़ेश3' से बात करते हुए मेहदी ताज ने भारी मन से कहा, "यह निश्चित है कि इस हमले के बाद, हम विश्व कप को लेकर आशा की दृष्टि से नहीं देख सकते।"
मैदान की चुनौतियां और कड़े प्रतिबंध :
ईरान को फीफा विश्व कप के ग्रुप 'जी' में रखा गया है, जहाँ उसकी राह पहले से ही कठिन थी। कार्यक्रम के अनुसार:
- 15 जून: न्यूजीलैंड के खिलाफ (इंग्लेवुड, कैलिफोर्निया)
- 21 जून: बेल्जियम के खिलाफ मुकाबला
- 26 जून: मिस्र के खिलाफ (सिएटल) अंतिम ग्रुप मैच
हालाँकि, खेल से इतर कूटनीतिक दीवारें ईरान के लिए ज्यादा ऊँची साबित हो रही हैं। ट्रम्प प्रशासन द्वारा घोषित यात्रा प्रतिबंधों के पहले चरण ने पहले ही ईरानी प्रशंसकों के अमेरिका प्रवेश पर रोक लगा दी है। ऐसे में बिना समर्थकों और युद्ध जैसी स्थितियों के बीच खिलाड़ियों का मानसिक और शारीरिक रूप से मैदान पर उतरना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
फीफा की चुप्पी और भविष्य का सवाल :
संयुक्त रूप से अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको द्वारा आयोजित होने वाले इस टूर्नामेंट (11 जून से 19 जुलाई) को लेकर 'एसोसिएटेड प्रेस' ने जब फीफा से संपर्क किया, तो फिलहाल वहां से कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान इस टूर्नामेंट से हटता है, तो यह न केवल फीफा के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका होगा, बल्कि खेल के उस वैश्विक स्वरूप को भी चोट पहुँचाएगा जो शांति का संदेश देता है।
फिलहाल, मध्य-पूर्व की जलती सीमाएं और व्हाइट हाउस के कड़े फैसले ईरान के फुटबॉल सपनों को चकनाचूर करते दिख रहे हैं। क्या खेल राजनीति और युद्ध पर हावी हो पाएगा, या 2026 का विश्व कप ईरान के बिना ही खेला जाएगा, यह आने वाले कुछ हफ्तों की सैन्य और कूटनीतिक गतिविधियों पर निर्भर करेगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
