Earth’s Rotation Day 2026: हर साल 8 जनवरी को मनाया जाने वाला यह दिन हमें पृथ्वी के घूमने के महत्व की याद दिलाता है। लियोन फौकॉल्ट के ऐतिहासिक पेंडुलम प्रयोग से लेकर इस डरावनी सच्चाई तक कि अगर धरती रुक जाए तो क्या होगा—जानिए घूर्णन के पीछे का विज्ञान। छह महीने का दिन और रात, चुंबकीय क्षेत्र का विनाश और प्रलय की वैज्ञानिक चेतावनी की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

Earth’s Rotation Day 2026 : ब्रह्मांड के अनंत विस्तार में हमारी पृथ्वी एक ऐसे अदृश्य नृत्य में लीन है, जिसकी निरंतरता ही हमारे अस्तित्व की आधारशिला है। हर साल 8 जनवरी को मनाया जाने वाला 'पृथ्वी घूर्णन दिवस' (Earth’s Rotation Day) हमें उसी खामोश लेकिन शक्तिशाली गति की याद दिलाता है। यह दिन उस ऐतिहासिक क्षण को समर्पित है जब 1851 में फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी लियोन फौकॉल्ट ने अपने प्रसिद्ध 'फौकॉल्ट पेंडुलम' के माध्यम से पहली बार दुनिया को वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध कर दिखाया था कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है। पेरिस और ग्रीस के विज्ञान संग्रहालयों से शुरू हुआ यह प्रयोग आज भी आधुनिक विज्ञान का एक स्तंभ माना जाता है, जो हमें समझाता है कि क्यों हम एक सुपरसोनिक विमान से भी तेज गति से अंतरिक्ष में यात्रा कर रहे हैं और फिर भी जमीन पर सुरक्षित महसूस करते हैं।

पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना केवल दिन और रात का चक्र बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जटिल जैविक और भौतिक तंत्र का संचालन करता है। लगभग 24 घंटे में पूरा होने वाला यह एक चक्कर वायुमंडलीय धाराओं और समुद्री लहरों की दिशा निर्धारित करता है। 'कोरियोलिस प्रभाव' के माध्यम से यही घूर्णन तय करता है कि उत्तरी गोलार्ध में हवाएं दाईं ओर मुड़ेंगी या दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि पृथ्वी के घूमने से इसके पिघले हुए धात्विक कोर में गति बनी रहती है, जिससे एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। यह चुंबकीय कवच ही हमें सूर्य की उन विनाशकारी विकिरणों से बचाता है जो पल भर में जीवन को राख कर सकती हैं।

खगोलविदों और वैज्ञानिकों ने इस विशेष दिवस पर एक ऐसी डरावनी परिकल्पना साझा की है जो किसी भी इंसान की रूह कपा सकती है: "क्या होगा यदि पृथ्वी अचानक घूमना बंद कर दे?" यदि यह घूर्णन अचानक थम जाए, तो पृथ्वी का एक हिस्सा अंतहीन धूप और भीषण गर्मी की चपेट में आ जाएगा, जहाँ तापमान जीवन की सीमाओं को पार कर जाएगा। वहीं दूसरी ओर, पृथ्वी का पिछला हिस्सा छह महीने की लंबी काली रात और जमा देने वाली बर्फ की चादर में लिपट जाएगा। चुंबकीय क्षेत्र के कमजोर पड़ने से ओजोन परत का विनाश होगा और वायुमंडल का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा। यह कल्पना ही यह समझने के लिए पर्याप्त है कि हमारी हर सांस और हर ऋतु इस निरंतर गति की कर्जदार है।

आज जब दुनिया भर के विज्ञान संग्रहालयों और स्कूलों में बच्चे फौकॉल्ट पेंडुलम के प्रदर्शन को देखकर इस करिश्मे को समझ रहे हैं, तब सोशल मीडिया पर भी #EarthsRotationDay के जरिए इस वैज्ञानिक चेतना को फैलाया जा रहा है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस ब्रह्मांडीय व्यवस्था को समझने की कुंजी है जिसने हमें जीवन जीने का अवसर दिया है। पृथ्वी घूर्णन दिवस का समापन हमें एक गहरी कृतज्ञता के साथ करना चाहिए कि यह नीली दुनिया लगातार घूम रही है, क्योंकि इसका रुकना केवल एक घटना नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता का अंत होगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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