गुरुवार की रात साल का अंतिम सुपरमून चमकेगा, जिसे कोल्ड मून कहा गया है। यह चांद पृथ्वी के सबसे नजदीक पेरिजी बिंदु पर सुबह 4:44 बजे पहुंचेगा और सामान्य पूर्णिमा की तुलना में बड़ा और अधिक चमकदार दिखाई देगा। शहर से दूर जाकर इसे देखना सबसे उत्तम अनुभव देगा।

saarvashik supermoon 2025 india : खगोल विज्ञान के प्रेमियों के लिए गुरुवार की रात एक खास खगोलीय अनुभव लेकर आ रही है। इस साल की अंतिम पूर्णिमा का चांद सुपरमून के रूप में दिखाई देगा, जो सामान्य पूर्णिमा की तुलना में अधिक बड़ा और चमकदार प्रतीत होगा। इसे रातभर आसमान में देखा जा सकता है और यह खगोलीय घटना लोगों को अद्वितीय दृश्य अनुभव प्रदान करेगी।

सुपरमून को ‘कोल्ड मून’ भी कहा गया है। नेशनल अवॉर्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू के अनुसार, आज चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होगा, और इसकी दूरी लगभग 3 लाख 57 हजार 218 किलोमीटर होगी। चंद्रमा के उदित होते समय मून इल्युजन के कारण यह और भी विशाल दिखाई देगा, जिससे यह खगोलीय दृश्य अत्यधिक आकर्षक बनेगा।

सुपरमून सुबह 4 बजकर 44 मिनट पर पृथ्वी के सबसे नजदीकी बिंदु पर पहुंचेगा, जिसे खगोल विज्ञान में पेरिजी कहा जाता है। इस बिंदु पर आने से चंद्रमा सामान्य पूर्णिमा की तुलना में अधिक चमकीला और बड़ा दिखाई देता है। सारिका घारू ने बताया कि किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन शहर की रोशनी से दूर किसी खुले स्थान से इसे देखना सर्वोत्तम अनुभव प्रदान करेगा।

सुपरमून की यह घटना न केवल खगोलशास्त्र के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आम जनता को भी प्राकृतिक चांदनी के अद्भुत सौंदर्य का अनुभव कराने का अवसर देती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वर्ष का अंतिम अवसर है जब लोग इस प्रकार का विशाल और चमकदार पूर्णिमा चांद देख पाएंगे।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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