वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की घूर्णन गति लगातार धीमी हो रही है, जिससे भविष्य में एक दिन 24 घंटे से बढ़कर 25 घंटे का हो सकता है। चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण, जलवायु परिवर्तन और भूगर्भीय गतिविधियों के कारण यह बदलाव बेहद धीमे, लेकिन निश्चित रूप से हो रहा है।

Moon Gravity Effect : धरती की घूर्णन गति में लगातार, हालांकि सूक्ष्म बदलाव हो रहा है, जिससे भविष्य में एक दिन की लंबाई 24 घंटे से बढ़कर 25 घंटे तक पहुंच सकती है। यह कहानी सुनने में किसी विज्ञान कथा फिल्म जैसी लगती है, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों में यह संकेत स्पष्ट हैं कि पृथ्वी की रफ्तार धीमी हो रही है और यह धीमा परिवर्तन लंबे समय में दिन की अवधि को प्रभावित करेगा।

हम जिस 24 घंटे के दिन को सामान्य मानते हैं, वह वास्तव में एक औसत सौर दिवस है। पृथ्वी की घूर्णन गति स्थिर नहीं है, और यह समय के साथ बेहद धीमी रफ्तार से बदलती रहती है। इस बदलाव के पीछे चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण मुख्य भूमिका निभाता है, जो महासागरों में ज्वार-भाटा पैदा करके पृथ्वी के घूमने पर ब्रेक का काम करता है। नतीजतन, पृथ्वी की घूर्णन ऊर्जा धीरे-धीरे कम होती जाती है और चंद्रमा हर साल लगभग 3.8 सेंटीमीटर पृथ्वी से दूर खिसकता है।

इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों का पिघलना, समुद्र स्तर का बढ़ना और भूजल का अत्यधिक दोहन पृथ्वी के द्रव्यमान को बदलता है, जिससे दिन की लंबाई में मिलीसेकंड स्तर पर वृद्धि होती है। पृथ्वी के आंतरिक बदलाव, भूकंपीय गतिविधियां और कोर की हलचलें भी घूर्णन पर सूक्ष्म प्रभाव डालती हैं।

वैज्ञानिक दिन को सौर दिवस और नक्षत्र दिवस के आधार पर मापते हैं, जिनमें नक्षत्र दिवस सौर दिवस से लगभग चार मिनट छोटा होता है। आधुनिक जियोडेसी तकनीक, परमाणु घड़ियां, सैटेलाइट लेजर रेंजिंग और क्वासार सिग्नल के माध्यम से पृथ्वी की गति अत्यंत सटीक रूप से मापी जा रही है।

हालांकि यह परिवर्तन रोमांचक है, लेकिन 25 घंटे के दिन का वास्तविकता में अनुभव करना हमारी या आने वाली कई पीढ़ियों के जीवनकाल में संभव नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी-चंद्रमा प्रणाली में इस स्तर का बदलाव आने में लगभग 20 करोड़ साल का समय लगेगा।

यह अध्ययन न केवल पृथ्वी की घूर्णन गति की समझ बढ़ाता है, बल्कि भविष्य के खगोलीय और जलवायु अनुसंधान में भी मार्गदर्शन करेगा, और यह संकेत देता है कि हमारी ग्रह-समुदाय की बदलती गति समय और जीवन के पैमाने पर कैसे असर डालती है।

Updated On 31 Dec 2025 7:07 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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