वियान मलिक ने 12 साल में माउंट किलिमंजारो फतह कर रचा इतिहास
अहमदाबाद के 12 वर्षीय छात्र वियान मलिक ने माउंट आबू के SVIM संस्थान से प्रशिक्षण लेकर अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी उहुरू पीक पर तिरंगा फहराया।

जनवरी 2026 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो (5,895 मीटर) के उहुरू पीक पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के साथ 12 वर्षीय पर्वतारोही वियान मलिक।
माउंट आबू की पहचान सिर्फ एक हिल स्टेशन के रूप में ही नहीं होती बल्कि स्वामी विवेकानंद पर्वतारोहण संस्थान से भी होती है। यह संस्थान एक बार फिर सुर्खियों में है क्योंकि यहां से तीन साल तक लगातार ट्रेनिंग हासिल कर सिर्फ 12 साल के बच्चे वियान मलिक ने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो की 5,895 मीटर की चढ़ाई पूरी कर 12 वर्ष की उम्र में दुनिया में नाम कमाने वाला नन्हा पर्वतारोही बन गया है। यह कारनामा करने वाला वह दुनिया में इकलौता लड़का है।
प्रशिक्षण और संस्थान की गौरवशाली विरासत
वियान की साहसिक यात्रा की शुरुआत वर्ष 2023 में स्वामी विवेकानंद पर्वतारोहण संस्थान (SVIM), माउंट आबू से हुई, जो गुजरात सरकार के खेल, युवा एवं सांस्कृतिक गतिविधि विभाग के अंतर्गत संचालित है। यहीं उन्होंने ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के प्रति गहरी रुचि विकसित की। वर्ष 2023 से 2025 के बीच उन्होंने संस्थान की प्राचार्या श्रीमती राजल पटेल के नेतृत्व में सात-सात दिन की अवधि वाले पाँच साहसिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण किए।
- वियान मलिक पिछले तीन साल से स्वामी विवेकानंद पर्वतारोहण संस्थान में कड़ी ट्रेनिंग हासिल कर रहा था।
- संस्थान की प्राचार्य राजल पटेल ने बताया कि उनके कार्यकाल में एक नन्हा पर्वतारोही के साहस और शौर्य की गाथा हर कोई के लिए एक प्रेरणा बनेगी।
- यहाँ से ट्रेनिंग हासिल कर चावला जागीरदार, बछेंद्री पाल, वर्तमान प्राचार्य राजल पटेल सहित कई पर्वतारोहियों ने दुनिया भर में भारत का परचम लहराया है।
ऐतिहासिक उपलब्धि: उहुरू पीक पर फतह
गुजरात के लिए गर्व का विषय बनते हुए अहमदाबाद के प्रकाश हायर सेकेंडरी स्कूल, अहमदाबाद, (गुजरात) के 12 वर्षीय छात्र वियान मलिक ने अफ्रीका की सबसे ऊँची चोटी - "उहुरू पीक" (ऊँचाई 5,895 मीटर), माउंट किलिमंजारो को सफलतापूर्वक फतह कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। सातवीं क्लास में पढ़ने वाले वियान ने यह अद्भुत साहसिक कारनामा कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गुजरात राज्य का नाम रोशन किया है। वे गुजरात से उहुरू पीक (5,895 मीटर), माउंट किलिमंजारो, पर पहुँचने वाले सबसे कम उम्र के पर्वतारोही हैं।
"पूरे संस्थान में इस बात को लेकर खुशी जाहिर की गई।" - प्राचार्य राजल पटेल
अभियान का घटनाक्रम और कठिन चुनौतियां
वियान मलिक 17 जनवरी 2026 को अहमदाबाद से तंजानिया के लिए रवाना हुए और 28 जनवरी 2026 को सुरक्षित स्वदेश लौटे। यह पर्वतारोहण अभियान अनुभवी पर्वतारोही श्री अमरदीप सिंह के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कुल छह दिनों तक चले इस कठिन अभियान ने वियान की शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और साहस की कड़ी परीक्षा ली। शिखर तक पहुँचने के लिए अंतिम चढ़ाई लगभग 18 घंटे की निरंतर और अत्यंत चुनौतीपूर्ण रही।
अभियान के दौरान वियान को इन विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा:
- माइनस 11 डिग्री सेल्सियस तक गिरता तापमान।
- असमान व फिसलन भरे मार्ग।
- अत्यंत कम ऑक्सीजन।
मरांगू रूट से शिखर तक का सफर
वियान ने 20 जनवरी 2026 को मरांगू रूट (कोका-कोला रूट) से चढ़ाई प्रारंभ की। उन्होंने निम्नलिखित पड़ाव पार किए:
- मरांगू गेट (1,860 मीटर)
- मंडारा हट (2,720 मीटर)
- होरोम्बो हट (3,720 मीटर)
- किबो हट (4,750 मीटर)
- गिलमैन पॉइंट (5,681 मीटर) और स्टेला पॉइंट (5,756 मीटर)
अंततः 24 जनवरी 2026 को वे 5,895 मीटर ऊँची "उहुरू पीक" पर पहुँचे। शिखर पर पहुँचकर वियान मलिक ने अपने पिता सिद्धार्थ मलिक (45 वर्ष) के साथ भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उनकी माता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में कार्यरत हैं तथा पिता यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में कार्यरत हैं।
असाधारण साहस की सराहना
यह क्षण देशभक्ति, आत्मबल और भारतीय युवाओं की अटूट इच्छाशक्ति का सशक्त प्रतीक बन गया। अफ्रीकी अभियान दल ने वियान की अनुशासनप्रियता, आत्मसंयम और कठिन परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखने की क्षमता की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और इतनी कम उम्र में इस उपलब्धि को असाधारण बताया।

Pratahkal Bureau
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