सिरोही: माधव विश्वविद्यालय में शोध एवं डिजिटल नैतिकता पर राष्ट्रीय मंथन, अकादमिक जगत के दिग्गजों ने दिया ईमानदारी का संदेश
सिरोही के माधव विश्वविद्यालय में "उच्च शिक्षा में शोध एवं डिजिटल नैतिकता" पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। डॉ. चिराग ए. पटेल और प्रो. सुशील भार्गव जैसे दिग्गजों ने शोध में पारदर्शिता, प्लेज़रिज़्म की रोकथाम और डेटा सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। जानिए कैसे यह आयोजन शोधार्थियों के लिए समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

सिरोही। आधुनिक युग में जहाँ सूचनाओं का अंबार लगा है, वहीं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शोध की शुचिता और डिजिटल व्यवहार की नैतिकता को बनाए रखना एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। इसी महत्वपूर्ण विषय पर विमर्श हेतु सिरोही स्थित माधव विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य आगाज किया गया। 6 से 7 जनवरी तक चलने वाली इस कार्यशाला का मुख्य विषय "उच्च शिक्षा में शोध नैतिकता एवं डिजिटल नैतिकता" रखा गया है, जिसका उद्देश्य न केवल शोध की गुणवत्ता को निखारना है, बल्कि अकादमिक जगत में पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों के स्तंभों को और अधिक सुदृढ़ करना भी है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. चिराग ए. पटेल, निदेशक (शारीरिक शिक्षा, युवा एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ), हेमचंद्राचार्य उत्तर गुजरात विश्वविद्यालय, पाटन के कर-कमलों द्वारा हुआ। सभा को संबोधित करते हुए डॉ. पटेल ने एक अत्यंत मर्मस्पर्शी बात कही कि शोध केवल एक डिग्री हासिल करने की सीढ़ी नहीं है, बल्कि यह समाज, राष्ट्र और पूरी मानवता के प्रति शोधकर्ता का एक पावन उत्तरदायित्व है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के डिजिटल शैक्षणिक परिदृश्य में नैतिक आचरण का पालन करना किसी भी शोधार्थी के लिए अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है।
कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे माधव विश्वविद्यालय के प्रो-प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) सुशील भार्गव ने समस्त अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए इस आयोजन को मील का पत्थर बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि यहाँ से प्राप्त ज्ञान शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए भविष्य में एक प्रकाश स्तंभ की तरह कार्य करेगा, जिसे वे अपने वास्तविक शिक्षण और अनुसंधान कार्यों में आत्मसात करेंगे। इस दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. भावेश कुमावत, शिक्षा संकाय के अधिष्ठाता डॉ. जितेंद्र तिवारी और शारीरिक शिक्षा एवं विशेष शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ. भरत कुमार चौधरी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यशाला की रूपरेखा और उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए संयोजक डॉ. विष्णु चौधरी एवं सह-संयोजक डॉ. धरती सवानी ने बताया कि इस मंच का लक्ष्य डिजिटल युग की चुनौतियों के बीच नैतिक शोध को बढ़ावा देना है। विषय विशेषज्ञ के रूप में भारतीय शिक्षक शिक्षा संस्थान (आईआईटीई), गांधीनगर के डॉ. केवल गड़ानी ने अपनी विशेषज्ञता साझा की। उन्होंने शोध में ईमानदारी, प्लेज़रिज़्म (साहित्यिक चोरी) के खतरे, डेटा सुरक्षा और डिजिटल आचरण की बारीकियों पर विस्तार से तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया, जिससे शोधार्थी अपनी मौलिकता को सुरक्षित रख सकें।
इस बौद्धिक समागम में अकादमिक अधिष्ठाता डॉ. महेंद्र सिंह, आईक्यूएसी निदेशक डॉ. रूचि ठाकर, डॉ. संतोष कुमार जोशी, डॉ. चिंतन पटेल, डॉ. उर्वशी पटेल, डॉ. नियंता जोशी, डॉ. कुणाल सेठी, मुकेश कुमार, सिद्धार्थ बालेशा और बनवारी सिंह सहित विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे शोधार्थियों और विद्यार्थियों के बीच हो रहे इस सार्थक विचार-विमर्श ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए ऐसे आयोजनों की प्रासंगिकता आज पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

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