सिरोही के माधव विश्वविद्यालय द्वारा भूजेला स्थित अमेजिंग हीलिंग सेंटर में 'व्यक्तित्व विकास एवं स्वास्थ्य सुधार' पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। चांसलर हिम्मत सिंह देवल और अन्य विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के बढ़ते तनाव को कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने हेतु योग, मेडिटेशन और हीलिंग के महत्व पर प्रकाश डाला। जानिए इस विशेष आयोजन की पूरी रिपोर्ट।

सिरोही। आधुनिकता की अंधी दौड़ और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच विद्यार्थियों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में माधव विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय द्वारा भूजेला स्थित 'अमेजिंग हीलिंग सेंटर' में "व्यक्तित्व विकास एवं स्वास्थ्य सुधार" विषय पर एक गरिमामयी राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य ध्येय विद्यार्थियों में बढ़ते मानसिक तनाव को कम करना और उनके सर्वांगीण विकास के प्रति जागरूकता लाना रहा, जिसने क्षेत्र के शैक्षणिक और सामाजिक गलियारों में एक नई चर्चा छेड़ दी है।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित माधव विश्वविद्यालय के चांसलर हिम्मत सिंह देवल ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय के विद्यार्थियों के सम्मुख व्यक्तित्व विकास और स्वास्थ्य को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी राष्ट्रीय संगोष्ठियां विद्यार्थियों को न केवल सकारात्मक दिशा प्रदान करती हैं, बल्कि उनके भीतर छिपी क्षमताओं को निखारने का एक सशक्त माध्यम भी बनती हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजनों की निरंतरता पर बल दिया।

शिक्षा और स्वास्थ्य के अंतर्संबंधों को रेखांकित करते हुए विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) राजीव माथुर ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्तित्व विकास केवल बाहरी आवरण नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की वह नींव है जिससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में क्रांतिकारी सुधार आता है। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए प्रो-प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) सुशील भार्गव ने वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज का विद्यार्थी चौतरफा दबाव में है, ऐसे में स्वास्थ्य सुधार पर केंद्रित विमर्श समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

प्रशासनिक दृष्टिकोण साझा करते हुए विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. भावेश कुमावत ने कहा कि व्यक्तित्व का विकास और उत्तम स्वास्थ्य केवल छात्र जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए अनिवार्य है। वहीं, होम्योपैथी कॉलेज की निदेशिका डॉ. भारती देसाई ने विद्यार्थियों के मानसिक संघर्षों पर प्रकाश डालते हुए मेडिटेशन और हीलिंग को उपचार का एक प्रभावी मार्ग बताया। अमेजिंग हीलिंग स्पेस की निदेशक डॉ. रोजा टूम्मा ने तनावपूर्ण जीवनशैली के समाधान के रूप में ध्यान और साधना की वैज्ञानिक महत्ता को प्रतिपादित किया, जो शरीर और मन दोनों को सशक्त बनाने में सक्षम है।

कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर के अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) गीतम सिंह ने प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव से उत्पन्न होने वाली व्याधियों का जिक्र करते हुए योग, आयुर्वेद और शारीरिक उपचार के समन्वय को विद्यार्थी जीवन के लिए वरदान बताया। संगोष्ठी के दौरान विशेषज्ञ वक्ता हिमांशु जैन, सिद्धार्थ भाटिया और साइकोलॉजी एवं काउंसलिंग विशेषज्ञ रिमांशु जैन ने भी अपने सारगर्भित विचार साझा किए, जिन्हें श्रोताओं ने अत्यंत रुचि के साथ सुना। इस अवसर पर ललित परिहार, इन्दर सिंह घांची, पवित्र कुमार और किशोर भाई समेत बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। यह संगोष्ठी न केवल एक संवाद का माध्यम बनी, बल्कि इसने युवा पीढ़ी को एक स्वस्थ और संतुलित भविष्य की ओर अग्रसर होने का मार्ग भी प्रशस्त किया।

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