गंगापुर सिटी में आर्य समाज के तत्वाधान में आयोजित चार दिवसीय चतुर्वेद शतकम यज्ञ और वैदिक कृष्ण कथा का भव्य समापन हुआ। विदुषी संगीता आर्या और एस.डी.एम. बृजेंद्र मीणा की उपस्थिति में हुए इस समारोह में महर्षि दयानंद के आदर्शों, नारी सशक्तिकरण और पाखंड मुक्त समाज के निर्माण पर जोर दिया गया। भजनों और यज्ञ की आहूतियों के साथ संपन्न हुए इस कार्यक्रम में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

गंगापुर सिटी। राजस्थान के गंगापुर सिटी स्थित भगवती मैरिज गार्डन में आध्यात्म और समाज सुधार की एक नई अलख जगाते हुए चार दिवसीय 'चतुर्वेद शतकम यज्ञ' एवं 'वैदिक कृष्ण कथा' का रविवार को श्रद्धापूर्वक समापन हुआ। आर्य समाज भगवती नगर के तत्वाधान में आयोजित इस भव्य अनुष्ठान ने न केवल शहरवासियों को वैदिक संस्कृति से जोड़ा, बल्कि आधुनिक समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध एक वैचारिक क्रांति का भी आह्वान किया। आयोजन के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने यह सिद्ध कर दिया कि आज भी जनमानस में वेदों के प्रति अटूट निष्ठा और श्रेष्ठता का भाव विद्यमान है।

समापन समारोह की शुरुआत वेदमंत्रों की पवित्र गूंज और आहुतियों के साथ हुई, जहाँ ब्रह्मा विदुषी संगीता आर्या ने विधि-विधान से यज्ञ संपन्न कराया। इस पुनीत अवसर पर उपखंड अधिकारी (एस.डी.एम.) बृजेंद्र मीणा सहित मुख्य यजमानों के रूप में राहुल, अनिल गर्ग, सुनील जिंदल, रामकिशन सैनी, शंभुदयाल आर्य और अजय ने सपरिवार पूर्णआहुति देकर विश्व कल्याण की कामना की। अपने ओजस्वी संबोधन में विदुषी संगीता आर्या ने स्पष्ट किया कि आर्य समाज कोई संप्रदाय या मत नहीं, बल्कि अंधविश्वास और पाखंड के विरुद्ध एक निरंतर चलने वाला सुधारवादी आंदोलन है। उन्होंने 'आर्य' शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका अर्थ 'श्रेष्ठ' है और जब व्यक्ति के आचरण में श्रेष्ठता या आर्यत्व का समावेश होता है, तभी समाज उन्नति के पथ पर अग्रसर होकर 'रामराज्य' की परिकल्पना को साकार कर सकता है। उन्होंने महर्षि दयानंद के 16 संस्कारों पर बल देते हुए सुरीले भजनों के माध्यम से "आओ मिलके विचार करें, पहले हम आप सुधरे फिर औरों का सुधार करें" और "दयानंद वो मतवाला गया था करके उजाला" जैसे गीतों से श्रोताओं में नए उत्साह का संचार किया।

कार्यक्रम के दौरान आर्य समाज के संरक्षक पंडित मदन मोहन आर्य ने स्वामी दयानंद सरस्वती के क्रांतिकारी विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार महर्षि ने स्त्री शिक्षा, वेदाध्ययन और नारी को समान अधिकार दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने तर्क दिया कि बिना नारी शक्ति के उत्थान के समाज की उन्नति संभव नहीं है। उन्होंने देश के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराते हुए कहा कि महाभारत काल तक भारत विश्वगुरु था, किंतु उसके पश्चात आए पतन को केवल वैदिक ज्ञान, धर्मराज्य और चारित्रिक उत्थान के माध्यम से ही पुनः बदला जा सकता है। समारोह के मुख्य अतिथि एस.डी.एम. बृजेंद्र मीणा ने यज्ञ के वैज्ञानिक महत्व को प्रतिपादित किया। उन्होंने बताया कि घी, कपूर, लौंग और गूगल जैसी सामग्री के दहन से निकलने वाले वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) पर्यावरण को शुद्ध करते हैं और हानिकारक बैक्टीरिया का नाश करते हैं।

इस भव्य आयोजन की पूर्णाहुति 'ऋषि लंगर' के साथ हुई, जिसमें सभी आगंतुकों ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम की सफलता में प्रधान ओमप्रकाश, रमेश किशोरपुरा, सुरेश डांस, रामदयाल डांस, मंत्री राजेश आर्य, गोवर्धन लाल गर्ग, प्रदीप आर्य, मिथलेश आर्य, बबीता आर्य, सावित्री देवी, कुशला खट्टेटा, रामप्यारी देवी, ऊषा, अनीता डांस और ममता सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं का सराहनीय योगदान रहा। यह आयोजन गंगापुर सिटी के इतिहास में वैदिक संस्कृति के पुनर्जागरण के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।

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