चौथ का बरवाड़ा: दुकानदारों की भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, प्रशासन से लिखित आश्वासन की मांग
लव-कुश वाटिका प्रोजेक्ट के विरोध में खातोलाव परिसर के व्यापारी आमरण अनशन पर डटे, 1 मार्च को एडीएम की अध्यक्षता में होगी महत्वपूर्ण बैठक।

चौथ का बरवाड़ा के खातोलाव परिसर में अपनी आजीविका बचाने के लिए दूसरे दिन भी आमरण अनशन पर बैठे पीड़ित दुकानदार और स्थानीय व्यापारी।
चौथ का बरवाड़ा। चौथ माता मंदिर मार्ग स्थित खातोलाव परिसर में 35 से 40 वर्षों से व्यवसाय कर रहे दुकानदारों का आमरण अनशन शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। गुरुवार से भूख हड़ताल पर बैठे अनशनकारियों में चौथ माता पुजारी शंकर लाल सैनी, प्रहलाद मीना, राधेश्याम सैनी, दीपक कंडेरा, कमलेश सैनी, सुरेंद्र सिंह सोलंकी, जगदीश सैनी, विजय सैनी, मुकेश सैनी I, मुकेश सैनी II सहित अन्य दुकानदार शामिल हैं। सभी ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी न्यायोचित मांगों पर प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक वे आमरण अनशन जारी रखेंगे।
दशकों पुरानी आजीविका का संकट
दुकानदारों का कहना है कि वे पिछले तीन से चार दशकों से चौथ माता मंदिर मार्ग पर आने वाले श्रद्धालुओं को पूजा-प्रसाद, नारियल, चुनरी, श्रृंगार सामग्री, खिलौने, प्रसाद तथा खान-पान की वस्तुएं उपलब्ध कराते रहे हैं। यही उनका मुख्य व्यवसाय रहा है और इसी से उनके परिवारों का गुजारा चलता आया है। कई परिवारों की दूसरी पीढ़ी भी इसी काम से जुड़ी हुई है। चतुर्थी और मेले के अवसर पर यहां व्यापार में विशेष वृद्धि होती थी, जिससे स्थानीय स्तर पर मजदूरों, परिवहन कर्मियों और अन्य छोटे व्यापारियों को भी रोजगार मिलता था। दुकानदारों का कहना है कि यह केवल दुकानें नहीं थीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक परंपरा और स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं।
प्रशासनिक वार्ता और लव-कुश वाटिका प्रोजेक्ट
अनशन के प्रथम दिन सायंकाल को डीएफओ सुनील चौधरी ने भी वार्ता की, लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया। वहीं उनके बाद थानाधिकारी महेंद्र कुमार शर्मा भी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लेते हुए समझाइश का प्रयास किया। शुक्रवार को उपखंड अधिकारी जोगेंद्र सिंह, ग्रामीण सीओ हंसराज बैरवा और तहसीलदार नीरज सिंह अनशन स्थल पर पहुंचे और दुकानदारों से चर्चा की। उपखंड अधिकारी ने बताया कि 1 मार्च को एडीएम की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें खंडार विधायक जितेंद्र गोठवाल सहित वन विभाग और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ही समस्या के समाधान पर विचार किया जाएगा।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार खातोलाव क्षेत्र में विकसित की जा रही लव-कुश वाटिका परियोजना के तहत वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और दीवार निर्माण के लिए यह कार्रवाई की गई है। विभाग का कहना है कि पूर्व में नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा में पालन नहीं होने पर कार्रवाई करनी पड़ी।
लिखित आश्वासन और पुनर्वास की मांग
दुकानदारों का कहना है कि "हालिया कार्रवाई की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।" उनका यह भी कहना है कि "जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी में यह कार्रवाई हुई है, उनकी भूमिका की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।" दुकानदार मांग कर रहे हैं कि "सभी प्रभावित व्यापारियों को उनके पूर्व स्थान पर 20 से 25 फीट की स्थायी दुकान आवंटित की जाए, ताकि वे पुनः अपना व्यवसाय शुरू कर सकें।" उनका कहना है कि "जब तक स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होती, तब तक प्रशासन की ओर से अंतरिम आर्थिक सहायता दी जाए, जिससे उनके परिवारों का भरण-पोषण हो सके।" अनशनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अनशन के दौरान किसी की तबीयत बिगड़ती है या कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
स्वास्थ्य जांच और वर्तमान स्थिति
समाचार लिखे जाने तक अनशन को करीब 30 घंटे से अधिक समय बीत चुका था, सायंकाल 5:00 बजे लगभग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौथ का बरवाड़ा के स्वास्थ्य विभाग की टीम अनशनकारियों की स्वास्थ्य जांच के लिए मौके पहुंची और सभी अनशनकारियों के स्वास्थ्य की जांच की गई। अनशनधारियों के परिजनों और समर्थकों में समय बीतने के साथ ही स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता का माहौल बना हुआ है। फिलहाल समाचार लिखे जाने तक सभी अनशनकारी अपने संकल्प पर अडिग हैं और 1 मार्च की बैठक से सकारात्मक समाधान की उम्मीद लगाए हुए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन विकास और आजीविका के बीच संतुलन स्थापित कर पाता है या नहीं।
वन विभाग की हठधर्मिता पर पुजारी के आरोप
चौथ माता पुजारी शंकर लाल सैनी ने बताया कि "वन विभाग के अधिकारियों ने न केवल सैकड़ों दुकानदारों की रोज़ी-रोटी छीनी, बल्कि चौथ माता मंदिर पर चल रहे शिखर निर्माण कार्य को भी दो माह से रोक रखा है।" उन्होंने कहा कि "चौथ माता मंदिर हजारों-लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ सैकड़ों परिवारों की रोजगार की आश्रय स्थल भी है। यह सब वन विभाग की हठधर्मिता के कारण हुआ है।"

Pratahkal Bureau
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