लव-कुश वाटिका परियोजना हेतु हटाई गई दुकानों के विरोध में 90 परिवारों की आजीविका का संकट, विधायक और प्रशासन के बीच आज समाधान के लिए होगी वार्ता।

52 घंटे से जारी भूख हड़ताल और प्रशासन की चुनौती

कस्बे के प्रसिद्ध चौथ माता मंदिर मार्ग स्थित खातोलाव परिसर के दुकानदारों की भूख हड़ताल 52 घंटे से अधिक समय से जारी है। चौथ माता के पुजारी शंकर लाल सैनी के नेतृत्व में 10 दुकानदार गुरुवार सुबह 11 बजे से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं। प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने के कारण आंदोलन जारी है और क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। विकास और रोजगार के बीच छिड़ी इस जंग का आज तीसरा दिन है।

चार दशकों का व्यापार और अचानक हुई बेदखली

दुकानदारों का कहना है कि वे पिछले 35 से 40 वर्षों से खातोलाव परिसर में दुकानें लगाकर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को पूजा सामग्री, प्रसाद, चाय-नाश्ता व अन्य वस्तुएं उपलब्ध कराते रहे हैं और इसी आय से उनके परिवारों का पालन-पोषण होता रहा है। वन विभाग द्वारा लव-कुश वाटिका परियोजना के तहत पिछले बुधवार और रविवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, जिसके बाद दुकानों को हटा दिया गया। इस कार्रवाई के बाद से ही दुकानदारों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

ज्ञापन और विफल होती वार्ताओं का दौर

कार्रवाई के विरोध में सभी दुकानदार एकजुट हुए और वन मंत्री के नाम उपखंड अधिकारी जोगेन्द्र सिंह के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया। तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी समाधान नहीं निकलने पर गुरुवार सुबह 11 बजे से शंकर लाल सैनी सहित 10 दुकानदार भूख हड़ताल पर बैठ गए। वन विभाग के डीएफओ सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी पिछले दिनों अनशनकारियों को समझाने पहुंचे, लेकिन ठोस आश्वासन के अभाव में वार्ता सफल नहीं हो सकी।

गिरता स्वास्थ्य और परिजनों की बढ़ती चिंता

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौथ का बरवाड़ा की टीम सुबह-शाम अनशनकारियों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है। परीक्षण में कुछ अनशनकारियों का रक्तचाप बढ़ा हुआ पाया गया है, जबकि एक-दो में शुगर संबंधी समस्या भी सामने आई है। अनशनकारियों के परिजनों में स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ रही है, लेकिन आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अडिग हैं।

90 परिवारों का भविष्य और सामाजिक समीकरण

दुकानदारों का कहना है कि इस कार्रवाई से लगभग 90 से अधिक परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित दुकानदारों में अधिकांश अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े हैं। उनका तर्क है कि बिना पुनर्वास की वैकल्पिक व्यवस्था किए दुकानें हटाना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। मामला अब प्रदेश स्तर तक भी पहुंच चुका है और राजस्थान सरकार में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा तक अनशनकारियों की पीड़ा पहुंचने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने संबंधित विभाग को पत्र लिखकर समाधान की दिशा में पहल करने को कहा है।

निर्णायक बैठक और आंदोलन तेज करने की चेतावनी

आज रविवार सुबह 10 बजे प्रस्तावित अहम बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इस बैठक में खंडार विधायक जितेंद्र गोठवाल सहित वन विभाग और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि यदि इस बैठक में सकारात्मक निर्णय लिया गया तो आंदोलन समाप्त हो सकता है, अन्यथा अनशनकारियों ने सामूहिक भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।

नेतृत्वकर्ता शंकर लाल सैनी ने स्पष्ट कहा है कि — "यदि रविवार की बैठक में हमारी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल 10 लोग अनशन पर हैं, लेकिन आवश्यकता पड़ी तो सभी दुकानदार सामूहिक रूप से भूख हड़ताल पर बैठेंगे।"

वर्तमान में अनशन स्थल पर प्रधान संपत पहाड़िया, समाजसेवी कमलेश पहाड़िया, अनिल जैन, आचार्य अवधेश दाधीच, बाबू लाल सैनी मेडिकल सहित कई गणमान्य नागरिक पहुंचकर समर्थन दे रहे हैं। कस्बेवासियों और सामाजिक संगठनों का भी इस आंदोलन को भरपूर समर्थन मिल रहा है। फिलहाल 52 घंटे से अधिक समय से जारी यह भूख हड़ताल प्रशासन के लिए परीक्षा की घड़ी बन चुकी है।

Pratahkal Bureau

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