रियल एस्टेट में आम आदमी के घर का सपना अनिश्चिती में है। RERA, NCLT और CDRC खरीदार सुरक्षा के लिए बने हैं, लेकिन लंबित मामले, जटिल प्रक्रियाएं और प्रशासनिक चुनौतियां समाधान को धीमा कर रही हैं। जानें कैसे ये संस्थाएं और नियम घर खरीदारों के हितों को प्रभावित कर रहे हैं।

रियल एस्टेट क्षेत्र में लगातार बढ़ती धोखाधड़ी और देरी के बीच, आम आदमी का घर का सपना कई बार अधर में लटका दिखाई देता है। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA), नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (CDRC) जैसी संस्थाओं का गठन खरीदारों की सुरक्षा और बिल्डर्स की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए किया गया, लेकिन इनकी जटिल प्रक्रियाओं और प्रशासनिक चुनौतियों ने कई मामलों को लंबित और समाधान को धीमा बना दिया है।

RERA 2016 के तहत राज्य स्तरीय प्राधिकरणों (जैसे MahaRERA, UP-RERA) के माध्यम से कार्यरत है। इसका उद्देश्य बिल्डर्स को उत्तरदायी बनाना और घर खरीदारों को धोखाधड़ी से बचाना है। सभी बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, और बिल्डर्स को 70% राशि एस्क्रो अकाउंट में सुरक्षित रखना होता है। तीन माह पर प्रगति रिपोर्ट और निर्माण, फाइनेंस और अप्रूवल्स की जानकारी सार्वजनिक करनी होती है। देरी या कैंसिलेशन पर खरीदार को ब्याज समेत मुआवजा दिया जाता है।

हालांकि, कई राज्यों में स्टाफ की कमी, छोटे प्रोजेक्ट्स का रजिस्ट्रेशन से बचना और मामलों का लंबित रहना RERA की प्रभावशीलता को कमजोर करता है। केवल 28% मामले ही पूरी तरह से निपटते हैं, और कई बार बिल्डर्स NCLT में जाकर RERA आदेश को चुनौती दे देते हैं।

NCLT बड़ी वित्तीय असफलताओं से जुड़े मामलों को संभालता है। यह संस्थागत दृष्टिकोण से खरीदारों को रिफंड या प्रोजेक्ट पूरा कराने में मदद करता है। हालांकि, लेनदारों को प्राथमिकता और प्रक्रिया की जटिलता खरीदारों के लिए राहत पाना कठिन बनाती है। कई प्रोजेक्ट लंबे समय तक रुके रहते हैं और खरीदार लटके रहते हैं।

CDRC कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत खरीदारों को शिकायत दर्ज करने का सरल मंच देता है। यह आयोग देरी, खराब क्वालिटी या गलत प्रैक्टिस पर मुआवजा, रिफंड और कब्जा दिलाने में सक्षम है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि RERA, NCLT और CDRC समानांतर रूप से उपयोग किए जा सकते हैं। बावजूद इसके, मामलों का भारी बैकलॉग, लंबी सुनवाई और आदेश लागू करवाने की कठिनाइयां ग्रामीण और कम शिक्षित खरीदारों के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। इस प्रकार, जबकि तीनों संस्थाएं रियल एस्टेट में पारदर्शिता और खरीदार सुरक्षा के लिए मौजूद हैं, जटिल प्रक्रियाएं और प्रशासनिक अड़चनें आम आदमी के घर का सपना अधर में लटका रही हैं।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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