ईडी ने जेपी इंफ्रा एमडी मनोज गौर को 12,000 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया। दिल्ली-एनसीआर में सुपरटेक, आम्रपाली, 3सी समेत 8 बिल्डर्स के प्रोजेक्ट्स अटके, 4 लाख करोड़ निवेश फंसा। आरईआरए, एनसीएलटी, एनबीसीसी और स्वामिह फंड से समाधान की कोशिशें तेज, लेकिन लाखों घर खरीदारों का सपना कब पूरा होगा?

दिल्ली-एनसीआर की चकाचौंध भरी ऊँची इमारतों के पीछे छिपे लाखों घर खरीदारों के आंसू अब एक बड़े घोटाले की चपेट में आ गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मनोज गौर को मनी लॉन्ड्रिंग और घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है, जिससे रियल एस्टेट के इस काले खेल की परतें खुलने लगी हैं। यह गिरफ्तारी न केवल जेपी ग्रुप के 12,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले को उजागर करती है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर में पिछले दो दशकों से अटके सैकड़ों प्रोजेक्ट्स की दर्दनाक कहानी को भी सामने लाती है, जहां 4.1 से 5.1 लाख आवासीय इकाइयों और करीब 4 लाख करोड़ रुपये का निवेश धूल चाट रहा है।


ईडी की जांच के अनुसार, जेपी इंफ्राटेक ने घर खरीदारों से वसूले गए फंड्स को अन्य परियोजनाओं में डायवर्ट कर दिया, जिससे 20,000 से अधिक खरीदारों का पैसा अटक गया। 2007 में शुरू हुए विश टाउन, कोव और कसिया जैसे प्रोजेक्ट्स आज भी अधूरे पड़े हैं, जहां करीब 50 प्रतिशत यूनिट्स का निर्माण रुका हुआ है। मामला इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) पहुंच चुका है, और मई 2025 में ईडी ने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मुंबई में 15 स्थानों पर छापेमारी कर 1.7 करोड़ रुपये नकद और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए। यह कार्रवाई 2017 की कई एफआईआर पर आधारित है, जो घर खरीदारों के विरोध प्रदर्शनों से उपजी थी।


दिल्ली-एनसीआर का रियल एस्टेट सेक्टर, जो कभी हाउसिंग बूम का प्रतीक था, अब बिल्डर घोटालों की भेंट चढ़ चुका है। सुपरटेक लिमिटेड का मामला इसकी मिसाल है, जहां एमराल्ड कोर्ट, इकोविलेज और ह्यूज जैसे प्रोजेक्ट्स में 2013-15 के दौरान ईएमआई सबवेंशन स्कीम के तहत हजारों ने बुकिंग की। बिल्डर ने फंड डायवर्ट कर प्रोजेक्ट अधर में लटका दिए, और केवल 30 प्रतिशत खरीदारों को कब्जा मिला। सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों को ईएमआई वसूली पर रोक लगाई है, जबकि कुल मूल्यांकन 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का है। अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सुपरटेक और आठ बैंकों के बीच सांठगांठ की जांच का आदेश दिया।


आम्रपाली ग्रुप ने 2010 से 2018 के बीच 42,000 से अधिक खरीदारों को धोखा दिया, फंड डायवर्जन और फर्जी मंजूरियों के जरिए। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में एनबीसीसी को अधूरे प्रोजेक्ट्स पूरा करने का जिम्मा सौंपा, जिससे अब तक 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। एनबीसीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 75 प्रतिशत खरीदारों को रिफंड या घर मिल चुका है, और शेष 2026 तक पूरे होने की उम्मीद है। इसी तरह, 3सी कंपनी के नोएडा सेक्टर-107 के लोटस 300 प्रोजेक्ट में 336 फ्लैट बुक हुए, लेकिन फंड मिसयूज से केवल 20 प्रतिशत यूनिट्स 2025 तक डिलीवर हो पाए। 2018 में डायरेक्टर्स गिरफ्तार हुए, और एनसीएलटी में रिजॉल्यूशन प्लान पास हो चुका है।


विनेश्वरा ग्रुप के गुरुग्राम स्थित अपना घर जैसे प्रोजेक्ट्स में 2014 से फंड मिसयूज और डुप्लिकेट बिक्री के आरोप लगे, जिससे 2015 में डायरेक्टर्स गिरफ्तार हुए। 40 प्रतिशत यूनिट्स डिलीवर हो चुके हैं, लेकिन शेष एनसीएलटी में लंबित हैं; 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों को नोटिस जारी किया। प्रीमिया ग्रुप के ग्रीन वैली प्रोजेक्ट में प्रमोटर्स फरार हो गए, और 2025 में नया डेवलपर टेकओवर कर चुका है, मगर 70 प्रतिशत काम अधूरा है—आरईआरए में 50 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं। मिस्ट एवेन्यू के फेस्टिवल सिटी स्कीम में ईएमआई सबवेंशन बंद होने से प्रोजेक्ट ठप, 30 प्रतिशत काम 2025 तक पूरा। असोला लैंड स्कैम में 2016 से 30 एकड़ सरकारी जमीन की फर्जी ट्रांसफर से 600 करोड़ का नुकसान, सीबीआई जांच जारी।


कानूनी मोर्चे पर सरकार ने घर खरीदारों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए हैं। रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट (आरईआरए), 2016 ने प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर बिल्डर्स की मनमानी पर अंकुश लगाया, देरी पर ब्याज या रिफंड सुनिश्चित किया। आईबीसी, 2016 के तहत एनसीएलटी ने होमबायर्स को फाइनेंशियल क्रेडिटर का दर्जा दिया, न्यूनतम 100 या 10 प्रतिशत खरीदार संयुक्त आवेदन कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एनबीसीसी जैसे पीएसयू को स्टेल्ड प्रोजेक्ट्स सौंपे जाते हैं। नवंबर 2025 में कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री ने एक पैनल गठित करने की योजना बनाई, जो एनसीएलटी की क्षमता मजबूत करेगी, डेडिकेटेड बेंच स्थापित करेगी, प्रोजेक्ट-वाइज रिजॉल्यूशन सक्षम करेगी और आरईआरए-आईबीसी के बीच समन्वय बढ़ाएगी। स्वामिह फंड के तहत 15,000 करोड़ रुपये से 1,00,000 अतिरिक्त घर पूरे होंगे, 2025 अंत तक 40,000 यूनिट्स डिलीवर।


ये कदम लाखों खरीदारों के टूटे सपनों को जोड़ने की कोशिश हैं, लेकिन चुनौतियां बरकरार हैं—निजी कैपेक्स की सतर्कता, कोर्ट डिले और फंडिंग गैप। फिर भी, ईडी की कार्रवाई और सरकारी सुधार दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट को नई दिशा दे रहे हैं, जहां आम आदमी का आशियाना अब न्याय की किरणों से रोशन होने की राह पर है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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