महापरिनिर्वाण दिवस 2025 : कैसा था डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर का संसद का आखरी दौर ; जाने पूरी कहानी विस्तार से
महापरिनिर्वाण दिवस 2025 : 6 दिसंबर 1956 को डॉ. भीमराव आंबेडकर का निधन हुआ। अंतिम दिनों में उनकी स्वास्थ्य समस्याओं और राज्यसभा में अंतिम उपस्थिति ने उनके अनुयायियों को भावुक कर दिया। उनके योगदान ने दलित उत्थान और संविधान निर्माण में अमिट छाप छोड़ी।

Dr B R Ambedkar last day in Parliament
महापरिनिर्वाण दिवस 2025 : 6 दिसंबर 1956 को भारत ने अपने समाज सुधारक और संविधान के जनक, डॉ. भीमराव आंबेडकर को खो दिया। शोषितों और कमजोर वर्गों के संरक्षक के रूप में प्रसिद्ध बाबासाहेब का निधन उनके अनुयायियों और देशभर के नागरिकों के लिए गहरा झटका था।
डॉ. आंबेडकर का जीवन संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा। पढ़ाई के लिए किए गए संघर्ष, दलितों और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए उनके प्रयास, और आज़ाद भारत के संविधान की रचना में उनका योगदान आज भी प्रेरणा का स्रोत है। हालांकि, उनके जीवन के अंतिम वर्षों में स्वास्थ्य समस्याओं ने उन्हें लगातार परेशान किया। डायबिटीज़, ब्लडप्रेशर, न्यूराइटिस और आर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारियों से जूझते हुए उनका शरीर काफी कमजोर हो गया था। गठिया के दर्द से वे कई रातें बिस्तर पर ही बिताते थे।
उनकी अंतिम सार्वजनिक उपस्थिति राज्यसभा की कार्यवाही में हुई। नवंबर 1956 में दिल्ली से बाहर रहे बाबासाहेब ने 12 नवंबर को पटना होते हुए काठमांडू में विश्व धर्म संसद में हिस्सा लिया। इस सम्मेलन का उद्घाटन नेपाल के राजा महेंद्र ने किया और मंच पर उन्हें अपने पास बैठने का सम्मान दिया, जो उनके बौद्ध धर्म में योगदान और कद को दर्शाता है। इस थकाऊ और लंबे दौरे के बाद, 30 नवंबर को दिल्ली लौटने पर भी उनकी सेहत में सुधार नहीं था।
Dr B R Ambedkar last day in Parliament
दिल्ली में संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो चुका था, और खराब स्वास्थ्य के बावजूद 4 दिसंबर को डॉ. आंबेडकर ने राज्यसभा की कार्यवाही में भाग लिया। डॉक्टर मालवंकर ने उनकी सेहत की जांच के बाद अनुमति दी। दोपहर में सत्र के बाद लौटकर उन्होंने आराम किया। यह उनके संसद का अंतिम दौरा साबित हुआ।
अंततः, 6 दिसंबर 1956 को सुबह के समय बाबा साहेब ने अंतिम सांस ली। उनके जीवन और कार्यों ने न केवल समाज के कमजोर वर्गों के लिए एक मार्गदर्शक का काम किया, बल्कि उनकी उपलब्धियां आज भी भारत के लोकतांत्रिक और सामाजिक ताने-बाने का हिस्सा हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
