छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में आमेट क्षेत्र के ग्रामीणों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कचरा निस्तारण में गंभीर समस्याओं, दुर्गंध और स्वास्थ्य जोखिमों को उजागर करते हुए प्रशासन से 15 दिनों में स्थायी समाधान, चारदीवारी और नियमित सफाई व्यवस्था की मांग की।

आमेट। आमेट लिकी एवं आसपास के ग्रामीणों ने क्षेत्र में बढ़ते कचरे और अव्यवस्थित निस्तारण को लेकर प्रशासन का ध्यान खींचा। मंगलवार को ग्रामीणों एवं गौभक्तों ने उपखंड अधिकारी आमेट के नाम तहसीलदार पारस मल बुनकर को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें नगर पालिका द्वारा कचरे के असुरक्षित ढेर और उससे होने वाले स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरों की ओर आगाह किया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि नगरपालिका आमेट पिछले कई वर्षों से कस्बे का कचरा, मृत पशु अवशेष एवं अन्य गंदगी आमेट लिकी रोड और आमेट आक्या रोड पर गांवों के आने-जाने वाले मार्गों के किनारे जमा कर रही है। इससे न केवल वातावरण दूषित हो रहा है बल्कि रोग फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। ज्ञापन में कहा गया कि कचरे के ढेर से दुर्गंध फैल रही है और मवेशियों के लिए यह क्षेत्र असुरक्षित बन गया है। पिछले कुछ महीनों में स्थिति और गंभीर हो गई है, जिससे स्थानीय निवासियों में बीमारी फैलने की आशंका बढ़ गई है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कचरे के पास घूमने वाले कई मवेशियों और गौवंशियों की प्लास्टिक तथा जहरीला कचरा खाने से मृत्यु तक हो चुकी है। उन्होंने ज्ञापन में मांग की कि कचरा डंपिंग स्थल पर चारदीवारी बनाकर उसे सुरक्षित किया जाए और 15 दिनों के भीतर कचरे का नियमित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही आसपास के रास्तों और क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को नियमित बनाए रखने की भी मांग की गई।

ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले ग्रामीण प्रतिनिधियों में गोटू गुर्जर, अजयसिंह चुंडावत, शंकरसिंह रावत, टमुसिंह चुंडावत, जितेंद्रसिंह चुंडावत, शैतान सिंह, कैलाश सिंह, ललित पालीवाल, रविंद्र सिंह, बाबूसिंह रावत, सुरेश सुथार, गणपतलाल सुथार, राजूसिंह, मुकेश हरियाल, कन्हैयालाल गर्ग, रमेश महात्मा, धर्मचंद गुर्जर, प्रभुलाल गुर्जर, कैलाशसिंह, रोहित राजसिंह, जितेंद्रसिंह सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल थे।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि समय पर प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई तो वे स्वयं सफाई अभियान चलाने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी। यह मामला न केवल स्वास्थ्य और पर्यावरण की गंभीर चुनौती है बल्कि स्थानीय प्रशासन के कचरा प्रबंधन की क्षमता पर भी सवाल उठाता है।

Updated On 17 Nov 2025 8:32 PM IST
Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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