रेलमगरा के रेगर मोहल्ले में पुश्तैनी मकान विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। उदयलाल पुत्र जस्साजी रेगर ने अपने भाई वेणीराम और पंचों पर धोखाधड़ी व जबरन बेदखल करने का आरोप लगाया। पीड़ित परिवार अब पुलिस अधीक्षक, राजसमंद के पास न्याय की गुहार लगा रहा है।

राजसमंद। रेलमगरा कस्बे के रेगर मोहल्ले में पुश्तैनी मकान को लेकर चल रहे विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। उदयलाल पुत्र जस्साजी रेगर ने आरोप लगाया है कि उनके सगे भाई वेणीराम और समाज के कुछ पंचों ने उनकी अनपढ़ता का लाभ उठाकर मकान के बंटवारे में धोखाधड़ी की और उन्हें जबरन बेदखल करने का प्रयास किया।

पीड़ित उदयलाल के अनुसार, उनके पिता के तीन पुत्र थे, जिनमें से एक नानालाल गोद चले जाने के बाद मकान पर कब्जा रखता था। समाज के पंचों की मौजूदगी में किए गए बंटवारे में उनके हिस्से के कमरे को दस्तावेज़ों में शामिल नहीं किया गया। जब उदयलाल ने इसका विरोध किया तो उनके और उनके परिवार के साथ मारपीट की गई।

उदयलाल ने बताया कि अभियुक्तों ने उन पर एक लाख रुपये का सामाजिक दंड लगाकर उन्हें गांव से बाहर कर दिया और समाज में हुक्का-पानी भी बंद कर दिया। 2 जुलाई 2025 को आरोपियों ने उनके मकान का ताला तोड़कर सामान बाहर फेंक दिया। विरोध करने पर उनकी पत्नी सायरी देवी को हार्ट अटैक आ गया।

पीड़ित उदयलाल ने पहले रेलमगरा थाने में शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय के माध्यम से बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत मामला पुलिस थाना रेलमगरा को भेजा। अब उदयलाल और उनका परिवार पुलिस अधीक्षक, राजसमंद के पास न्याय की गुहार लगाते हुए पहुंचे हैं।

इस विवाद ने न केवल पारिवारिक रिश्तों को तनावपूर्ण बना दिया है, बल्कि सामाजिक ढांचे और न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार की आवाज अब प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों तक पहुंच चुकी है, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील और महत्वपूर्ण बन गया है।

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