देवियों की मेरड़ा में गूंजे माँ के जयकारे, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति रस के बीच संपन्न हुआ वार्षिक ध्वजा महोत्सव
केलवा के समीप देवियों की मेरड़ा स्थित करणी माता और देवनगा माता मंदिर में वार्षिक ध्वजा महोत्सव हर्षोल्लास और वैदिक परंपराओं के साथ संपन्न हुआ। अभिजीत मुहूर्त में मंत्रोच्चार के बीच मंदिर शिखर पर ध्वजा फहराई गई, वहीं भजन गायक रामावतार मारवाड़ी की स्वर लहरियों पर पूरी रात श्रद्धालु झूमते रहे। महाआरती और विशाल भंडारे के साथ इस अलौकिक अनुष्ठान का समापन हुआ। पढ़िए आस्था और भक्ति से सराबोर इस महोत्सव की विस्तृत रिपोर्ट।

केलवा क्षेत्र के समीपवर्ती देवियों की मेरड़ा की पावन धरा रविवार को भक्ति और श्रद्धा के अनूठे संगम का साक्षी बनी। यहाँ स्थित सिद्धपीठ श्री भगवती राज राजेश्वरी करणी मां एवं श्री लक्ष्मी स्वरूपा देवनगा माताजी के मंदिर में वार्षिक ध्वजा महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें आस्था का ऐसा ज्वार उमड़ा कि पूरा वातावरण धर्ममय हो गया। श्री करणी मां देवनगा सेवा समिति पसुन्द के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य समारोह में क्षेत्र भर से आए श्रद्धालुओं ने न केवल शीश नवाया, बल्कि वैदिक परंपराओं के निर्वहन के साथ धर्म के प्रति अपनी अटूट आस्था का परिचय भी दिया।
धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत भोर की पहली किरण के साथ ही हो गई थी, जब मंदिर परिसर वेद मंत्रों की ऋचाओं से गुंजायमान हो उठा। समिति अध्यक्ष जीजाबाई अंजू कंवर ने बताया कि वार्षिक उत्सव की गरिमा को बनाए रखते हुए विद्वान पंडितों के सानिध्य में एक दिव्य हवन का आयोजन किया गया। यज्ञ कुंड में उठती लपटों और स्वाहा के उद्घोष के साथ श्रद्धालुओं ने विश्व शांति और खुशहाली की कामना करते हुए आहुतियां दीं। समाजसेवी महेश प्रतापसिंह लखावत ने कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण की जानकारी देते हुए बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिन के सबसे शुभ माने जाने वाले अभिजीत मुहूर्त में, ठीक दोपहर 12:15 बजे, ध्वजारोहण की प्रक्रिया आरंभ हुई। ढोल-नगाड़ों की थाप और 'करणी माता की जय' के गगनभेदी जयकारों के बीच मंदिर के शिखर पर नवीन ध्वजा फहराई गई। हवा में लहराती लाल ध्वजा ने उपस्थित जनसमूह में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। इस अवसर पर माता रानी का अलौकिक और विशेष श्रृंगार किया गया था, जिसकी एक झलक पाने के लिए भक्त लालायित नजर आए।
इस महामहोत्सव की पूर्व संध्या भी कम अलौकिक नहीं थी। शनिवार की रात मंदिर परिसर में एक भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को पूरी रात बांधे रखा। सुप्रसिद्ध भजन गायक रामावतार मारवाड़ी ने अपने भजनों के माध्यम से ऐसा समां बांधा कि हर कोई भक्ति के रस में डूब गया। 'कीर्तन है रात माता आज थाने आणो है', 'मंगरा में विराजी माता करणी बेगी आवजे' और 'कठे रे लगाई अतरी देर भवानी' जैसी प्रस्तुतियों ने माहौल को भावविभोर कर दिया। जैसे ही गायक ने 'ठुमक ठुमक चाले भवानी ले हातां तलवार' और 'मारी जगदंबा' जैसे लोकप्रिय भजन छेड़े, पांडाल में मौजूद श्रद्धालु स्वयं को रोक न सके और भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे। देर रात तक चली इस भजन संध्या में भक्ति का उत्साह चरम पर था।
महोत्सव का समापन रविवार को महाआरती और महाप्रसादी के विशाल आयोजन के साथ हुआ। आरती के पश्चात हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पंगत प्रसादी ग्रहण की। इस संपूर्ण आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय युवाओं और वरिष्ठ जनों का अभूतपूर्व योगदान रहा। किशन सुथार, आयुष्मान सिंह लखावत, मोहन पालीवाल, मनोज, अशोक धर्मेटा, महेंद्र सिंह, नारायण लाल, नरेश पालीवाल, बाबू सिंह और मगन जोशी जैसे सेवाभावी सदस्यों ने व्यवस्थाओं की कमान संभाले रखी, जिससे यह विशाल आयोजन निर्विघ्न संपन्न हुआ। देवियों की मेरड़ा में आयोजित यह वार्षिक महोत्सव न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान था, बल्कि यह सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति की जीवंतता का एक सशक्त प्रमाण बनकर उभरा।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
