आमेट के समाजसेवी आजाद शाह के 5 वर्षीय दोहीते रजब शाह ने रमजान के पवित्र माह में रोजा रखकर और नमाज अदा कर खुशहाली की दुआ मांगी।

आमेट। मुस्लिम समुदाय के रमज़ान के पवित्र माह में रोज़ा रखने की तमन्ना केवल युवा और बुजुर्ग आयु वर्ग में ही सीमित नहीं है, बल्कि मासूम बच्चों में भी रोज़ा रखने का जज़्बा कायम है। इसी सिलसिले को कायम रखते हुए नगर के कुरैशी मोहल्ला निवासी समाजसेवी और मुस्लिम समाज के वरिष्ठ नेता आजाद शाह के 5 वर्षीय नन्हें दोहीते रजब शाह ने अपने जीवन का पहला रोज़ा रखकर एक मिसाल कायम की है।

भक्ति और समर्पण का संगम

रजब शाह ने न केवल रोज़ा रखा बल्कि ख़ुदा की राह में सजदा (नमाज) अदा कर खुशहाली की दुआं भी मांगी। इस नन्हीं उम्र में रजब के भीतर दिखा यह धार्मिक जज़्बा और अल्लाह के प्रति समर्पण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

परिवार ने बढ़ाया उत्साह

रोज़ा रखने पर परिवार के सदस्यों ने अपनी अपार खुशी का इजहार किया। परिजनों ने रजब शाह को माला पहनाकर और उसे बख्शीश देकर उसकी हौसला अफजाई भी की ताकि वह भविष्य में भी नेक राह पर अग्रसर रहे। "मुस्लिम समुदाय के रमज़ान के पवित्र माह में रोज़ा रखने की तमन्ना केवल युवा, बुजुर्ग आयु वर्ग में ही सीमित नहीं है, बल्कि मासूम बच्चों में भी रोज़ा रखने का जज़्बा कायम है।"

Pratahkal Bureau

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