राजसमंद के खमनोर ब्लॉक शिक्षा कार्यालय में करोड़ों की वित्तीय अनियमितता का मामला गरमाया। मुख्यमंत्री कार्यालय और विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ तक पहुंची शिकायतों के बाद जांच तेज। शिक्षक मनोज सोलिया और मुरलीधर नागौरी पर गंभीर आरोप, 83 से अधिक शिक्षक वसूली के दायरे में। भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

खमनोर। राजसमंद जिले के खमनोर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का गहराता जाल एक बार फिर प्रदेश की सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और स्थानीय विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ तक पहुंची शिकायतों के बाद अब विभागीय गलियारों में भारी हलचल देखी जा रही है। यह मामला न केवल करोड़ों रुपये के सरकारी राजस्व की संभावित हानि से जुड़ा है, बल्कि विभाग के भीतर जड़ जमाए बैठे रसूखदार कार्मिकों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।

इस पूरे प्रकरण के केंद्र में शिक्षक मनोज सोलिया की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने विद्यालय में कार्यरत रहते हुए भी कार्यालय के लेखा रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की और संदिग्ध प्रशासनिक निर्णयों को प्रभावित किया। परिवादी शिक्षक नन्दा सिंह द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण उनके जैसे लगभग 86 निष्ठावान शिक्षकों को उनके जायज चयनित वेतनमान (ACP) के लाभ से वंचित रखा जा रहा है। इसके विपरीत, प्रारंभिक शिक्षा कार्यालय द्वारा चहेते 9 कार्मिकों को नियम विरुद्ध तरीके से वित्तीय लाभ पहुंचा दिया गया है।

हैरतअंगेज तथ्य यह है कि जहां राज्य सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा कर रही है, वहीं खमनोर में कथित तौर पर करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। शिकायतकर्ता नन्दा सिंह, जिन्होंने इस भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाई, उन्हें उनके सेवानिवृत्ति के दिन यानी 31 दिसंबर 2025 को ही चार्जशीट थमा दी गई, जिसे प्रतिशोध की राजनीति के रूप में देखा जा रहा है। अब माध्यमिक शिक्षा राजसमंद ने खमनोर ब्लॉक कार्यालय से मनोज सोलिया द्वारा प्रस्तुत जवाबों पर बिंदुवार तथ्यपरक रिपोर्ट तलब की है। विभाग ने विशेष रूप से यह स्पष्ट करने को कहा है कि जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'चन्दाराम एवं प्रमोद कुमार' प्रकरण में विभाग के पक्ष में स्पष्ट मार्गदर्शन दिया जा चुका है, तो इसके बावजूद अप्रशिक्षित शिक्षकों को अनुचित वेतन निर्धारण का लाभ क्यों दिया गया।

वित्तीय धांधली की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शिक्षक मुरलीधर नागौरी को कथित तौर पर लगभग एक करोड़ रुपये का अनुचित लाभ देने की तैयारी थी, जिसमें से 28.56 लाख रुपये मार्च 2025 में उनके खाते में हस्तांतरित भी किए जा चुके हैं। जबकि उनकी योग्यता के आधार पर यह लाभ वर्ष 2028 में देय होना बताया जा रहा है। इसी प्रकार लगभग 83 अन्य शिक्षक भी अब रिकवरी यानी वसूली के दायरे में आ गए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एक अन्य परिवादी रिजवान फारूक लोधी ने भी मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर करीब 125 कर्मचारियों के वित्तीय लाभों की जांच की मांग की है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि भीलवाड़ा में पदस्थापित तत्कालीन अधिकारियों को बचाने के लिए जांच अधिकारियों को बार-बार बदला जा रहा है ताकि विभागीय पदोन्नति (DPC) तक मामले को लटकाया जा सके। राजनीतिक गलियारों में भी इस बात को लेकर आक्रोश है कि जो शिक्षक पूर्व में अन्य विचारधारा से जुड़े थे, वे अब सत्ताधारी दल के संगठनों में पैठ बनाकर अपनी पोस्ट बचा रहे हैं। निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि जांच को निष्पक्ष बनाने के लिए दोषी कार्मिकों का स्थानांतरण राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में किया जाए। यदि यह जांच अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचती है, तो शिक्षा विभाग के कई बड़े चेहरों का बेनकाब होना तय माना जा रहा है।

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