हल्दीघाटी रक्ततलाई से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रशासन गंभीर
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन ने खमनोर में कार्रवाई शुरू की, रसूखदारों को संरक्षण और कन्या शाला की दीवार तोड़ने पर ग्रामीणों में आक्रोश।

खमनोर में महाराणा प्रताप की ऐतिहासिक रणभूमि रक्ततलाई के समीप प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के बाद उपजा विवाद और क्षतिग्रस्त स्कूल की दीवार।
खमनोर (प्रातःकाल संवाददाता)। मेवाड़ की ऐतिहासिक धरोहर और महाराणा प्रताप की प्रसिद्ध रणभूमि रक्ततलाई, हल्दीघाटी के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। उच्च न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान लेते हुए दायर जनहित याचिका में केंद्र व राज्य सरकार सहित 16 विभागों को निर्देश जारी किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों के साथ रक्ततलाई व हल्दीघाटी क्षेत्र का दौरा कर कार्रवाई प्रारंभ की थी। हालांकि, प्रारंभिक स्तर पर शुरू हुई यह कार्रवाई दो दिनों में ही विवादों और भीड़तंत्र की भेंट चढ़कर दिशाहीन होती नजर आई। जिसके चलते बालिका विद्यालय की दीवार तोड़ी और दो दिन से वापस बन रही है।
अतिक्रमण की भेंट चढ़ती ऐतिहासिक धरोहर और प्रशासनिक विफलता
सूत्रों के अनुसार, हल्दीघाटी राष्ट्रीय स्मारक के समीप चारागाह भूमि पर विगत दो दशकों में हुए अवैध अतिक्रमण, उनवास पंचायत की कथित मिलीभगत से भूमि आवंटन, प्राकृतिक पहाड़ियों और नालों को भरकर संचालित की जा रही गतिविधियों से ध्यान हटाते हुए खमनोर कस्बे में सीमित तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई। बताया जाता है कि खमनोर कस्बे में एक दिन पूर्व माइक से सूचना प्रसारित कर अगले ही दिन बिना लिखित नोटिस कुछ मकानों व दुकानों के बाहर तोड़फोड़ की गई। इस दौरान कथित रूप से रसूखदारों को संरक्षण देने के आरोप भी लगे। कन्या शाला की दीवार गिराने की घटना के बाद ग्रामीणों व व्यापारियों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने पारदर्शी व नियमानुसार कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
राजनीतिक उपेक्षा और तकनीकी खामियां
विषय विशेषज्ञों का मानना है कि रक्ततलाई को राष्ट्रीय राजमार्ग से सीधे जोड़ने की योजना में अतिक्रमण सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आ रहा है। पूर्व में खमनोर से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का सर्वे होने के बावजूद राजनीतिक कारणों से राष्ट्रीय राजमार्ग को बाहर से निकाला गया, जिससे मूल रणभूमि क्षेत्र उपेक्षित रह गया। वर्तमान में भी पूर्व निर्मित सरकारी नालियों को बंद कर सड़क पर नई नालियों का निर्माण सामने आ रहे हैं, जिन्हें रोक पाने में प्रशासन पूर्णतः विफल रहा है।
एएसआई के नियमों की अवहेलना और भविष्य की राह
उल्लेखनीय है कि हल्दीघाटी क्षेत्र के प्रमुख स्थलों रक्ततलाई, शाहीबाग, दर्रा तथा चेतक समाधि को राष्ट्रीय महत्व का घोषित किया जा चुका है। इन स्थलों के संरक्षण की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंपी गई थी। नियमों की अवहेलना पर कड़े दंड का प्रावधान है, किंतु पिछले दो दशकों में जारी नोटिसों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से वर्तमान अभियान पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। स्थानीय प्रताप प्रेमी जनता का कहना है कि "यदि प्रशासन निष्पक्ष, पारदर्शी और समग्र योजना के साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करे तथा राष्ट्रीय राजमार्ग से रक्ततलाई सहित सभी प्रमुख स्थलों तक सुगम पहुंच सुनिश्चित करे, तो न केवल ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण होगा बल्कि ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।" हल्दीघाटी के संरक्षण के लिए उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद प्रशासन की निष्पक्षता अब अग्निपरीक्षा के दौर में है।

Pratahkal Bureau
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