आमेट में चंद्रभागा नदी पर पुलिया न होने से बरसात में रामबारी शमशानघाट की राह हुई दुर्गम। शवयात्राओं को नदी दरवाजा मार्ग अवरुद्ध होने के कारण भीलवाड़ा रोड से लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है। नगरवासियों ने नगरपालिका प्रशासन से जनहित में शीघ्र पक्की पुलिया निर्माण की मांग की है ताकि अंतिम विदाई में बाधा न आए।

आमेट। आस्था और अंतिम विदाई के क्षणों में जब प्रकृति बाधा बन जाए, तो परिजनों का दुख दोगुना हो जाता है। उपखण्ड मुख्यालय आमेट में इन दिनों कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिल रहा है। चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित रामबारी शमशानघाट तक पहुँचने का मार्ग बरसात के दिनों में अवरुद्ध होने से नगरवासियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अंतिम संस्कार के लिए ले जाए जा रहे शवों को उफनती नदी के कारण लंबे और घुमावदार रास्तों से ले जाने की विवशता ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

परंपरागत रूप से आमेट नगर में शवयात्रा 'नदी दरवाजा' मार्ग से ही शमशानघाट तक ले जाई जाती है। यह मार्ग न केवल सुगम है, बल्कि पीढ़ियों से इसी पथ का उपयोग होता रहा है। किंतु, मानसून के सक्रिय होते ही चंद्रभागा नदी का जलस्तर बढ़ने और बहाव तेज होने के कारण यह मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। ऐसी विषम परिस्थितियों में नगरवासियों के पास कोई विकल्प नहीं बचता और उन्हें मजबूरीवश रामचोक, वराई दरवाजा तथा नीमड़िया बावजी होते हुए भीलवाड़ा रोड का लंबा चक्कर काटना पड़ता है। शोक की घड़ी में कई किलोमीटर का यह अतिरिक्त सफर शोकाकुल परिजनों के लिए न केवल शारीरिक रूप से थकाऊ है, बल्कि मानसिक रूप से भी अत्यंत पीड़ादायक सिद्ध हो रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि आमेट नगर की लगभग एक तिहाई आबादी के लिए रामबारी ही मुख्य शमशानघाट है। इसके अतिरिक्त, इसी मार्ग पर बौहरा समुदाय का कब्रिस्तान और ऐतिहासिक घाणेराव तालाब भी स्थित है। नदी पर पुलिया न होने के कारण इन स्थानों तक पहुँचने वाले प्रत्येक व्यक्ति को बरसात के चार महीनों में भारी असुविधा झेलनी पड़ती है। नागरिकों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से चली आ रही इस गंभीर समस्या का समाधान अब तक नहीं हो पाया है, जिसके कारण कई बार शवयात्रा के दौरान गंभीर और असहज स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं।

इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर अब जनसमूह लामबंद होने लगा है। नगरवासियों ने सामूहिक रूप से नगरपालिका प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों से नदी दरवाजा के समीप चंद्रभागा नदी पर एक पक्की और ऊंची पुलिया के निर्माण की पुरजोर मांग की है। नागरिकों का तर्क है कि यदि इस स्थान पर पुलिया का निर्माण समय रहते कर दिया जाता है, तो भविष्य में बरसात के मौसम में अंतिम विदाई के समय होने वाली इस जद्दोजहद से मुक्ति मिल जाएगी। फिलहाल, गेंद प्रशासन के पाले में है और आमेट की जनता टकटकी लगाए बैठी है कि कब उनकी इस जायज मांग पर सरकारी मुहर लगती है और विकास का पहिया इस पवित्र मार्ग तक पहुँचता है।

Pratahkal Bureau

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