नाथद्वारा स्थित प्रभु श्रीनाथजी की हवेली में नव वर्ष 2026 के अवसर पर आस्था का महाकुंभ उमड़ा। तिलकायत श्री की आज्ञा एवं श्री विशाल बावा के कुशल निर्देशन में 31 दिसंबर से 3 जनवरी तक लगभग तीन लाख भक्तों ने खेवा पद्धति के माध्यम से सुगम दर्शन किए। सुरक्षा, महाप्रसाद वितरण और दिव्यांगों के लिए विशेष प्रबंधों के साथ मंदिर प्रशासन ने आधुनिक तकनीक और परंपरा का अनूठा उदाहरण पेश किया।

नाथद्वारा। नव वर्ष के स्वागत और प्रभु भक्ति की अटूट श्रद्धा के साथ पुष्टिमार्गीय प्रधान पीठ प्रभु श्रीनाथजी की हवेली में आस्था का एक अभूतपूर्व ज्वार उमड़ पड़ा। वर्ष 2025 की विदाई और 2026 के मंगल आगमन के अवसर पर समूची नाथद्वारा नगरी 'श्रीजी' के जयकारों से गुंजायमान रही। 31 दिसंबर से 3 जनवरी के मध्य करीब तीन लाख श्रद्धालुओं ने प्रभु के चरणों में शीश नवाकर नए वर्ष का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस भारी जनसमूह के बावजूद, मंदिर प्रशासन द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाओं के चलते भक्तों को सुगम और सानंद दर्शन प्राप्त हुए, जो आधुनिक प्रबंधन और प्राचीन परंपरा के अद्भुत समन्वय का प्रमाण बना।

तिलकायत श्री की आज्ञा एवं श्री विशाल बावा के कुशल निर्देशन में मंदिर प्रशासन ने इस बार दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए चाक-चौबंद प्रबंध किए थे। वैष्णवों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और दर्शन का प्रवाह निरंतर बना रहे, इसके लिए 'खेवा पद्धति' और सुव्यवस्थित रेलिंग प्रणाली का प्रभावी उपयोग किया गया। श्री विशाल बावा ने स्वयं नाथद्वारा पधारकर व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और सुरक्षा गार्डों सहित समस्त कर्मचारियों को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। दर्शन व्यवस्था में सुरक्षा और सुगमता का ऐसा संतुलन बनाया गया कि घंटों तक कतारों में खड़े रहने की विवशता को न्यूनतम किया जा सका।

विशेष रूप से, प्रीतम पोल (गेट नंबर दो) के माध्यम से मनोरथी वैष्णवों, वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों के साथ आने वाली माताओं और दिव्यांगों के लिए पृथक एवं सुलभ व्यवस्था सुनिश्चित की गई। मंदिर के मुख्य द्वारों पर तिलकायत श्री की आज्ञा से श्री विशाल बावा की प्रेरणा स्वरूप भक्तों को प्रभु का 'महाप्रसाद' वितरित किया गया, जिसे पाकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। यह सुव्यवस्थित तंत्र न केवल भीड़ को नियंत्रित करने में सफल रहा, बल्कि इसने किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या अव्यवस्था की आशंका को भी समाप्त कर दिया।

विश्व विख्यात इस प्रधान पीठ में उमड़ी यह भारी भीड़ प्रभु श्रीनाथजी के प्रति जन-जन की अगाध आस्था को दर्शाती है। श्री विशाल बावा के मार्गदर्शन में लागू की गई यह आधुनिक दर्शन प्रणाली और सेवा भाव, आने वाले समय में बड़े धार्मिक आयोजनों के प्रबंधन के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करती है। नव वर्ष के इन शुरुआती दिनों में मंदिर प्रशासन की इस सजगता ने लाखों वैष्णवों के हृदय पर एक अमिट छाप छोड़ी है, जिससे प्रभु की नगरी में भक्ति का मार्ग और भी सुगम एवं आनंदमयी प्रतीत हो रहा है।

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