श्रीजड़खोर गोधाम में गोपाष्टमी पर 10 हजार गोवंशों की पूजा — गोरक्षा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का लिया संकल्प
डीग के श्रीजड़खोर गोधाम में गोपाष्टमी पर्व का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें 10 हजार गोवंशों की वैदिक विधि से पूजा की गई। कार्यक्रम में देशभर से आए श्रद्धालुओं ने गोरक्षा का संकल्प लिया। भजन संध्या और भंडारे के साथ यह आयोजन बृज की सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का प्रतीक बना।

डीग। बृजमंडल की पावन भूमि पर स्थित श्रीजड़खोर गोधाम में बुधवार को गोपाष्टमी पर्व का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। इस अवसर पर करीब 10 हजार गोवंशों की सामूहिक पूजा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई, जिसने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। राजस्थान सरकार के गोपालन निदेशालय के सहयोग से आयोजित इस समारोह में देशभर से हजारों गोभक्तों ने भाग लिया और गोसेवा के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, गोपालन निदेशालय के निदेशक पंकज कुमार ओझा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार गोसंवर्धन, गोसेवा और गोपालन के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को गोरक्षा की शपथ दिलाते हुए कहा कि गोमाता भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं और उनका संरक्षण सनातन परंपरा की रक्षा के समान है। ओझा ने समाज से आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति गोवंश की सेवा और सुरक्षा में अपना योगदान दे, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस परंपरा को गर्व से आगे बढ़ा सकें।
श्रीजड़खोर गोधाम के सचिव अचिंत्य गर्ग ने बताया कि यह आयोजन स्वामी राजेंद्र दास जी महाराज की प्रेरणा से किया गया। उन्होंने कहा कि इस पर्व का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना से भी जुड़ा है। गोधाम में आयोजित गोपाष्टमी उत्सव का संदेश है — “गोरक्षा ही संस्कृति की रक्षा है।”
कार्यक्रम के दौरान भजन संध्या का भी आयोजन हुआ, जिसमें साध्वी पूर्णिमा दीदी की मधुर भक्ति प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजनों की गूंज और वैदिक अनुष्ठानों के साथ वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया। इस अवसर पर बृजमंडल के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने गोमाता की परिक्रमा कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
गोपाष्टमी पर्व के उपलक्ष्य में भव्य भंडारा भी आयोजित किया गया, जिसमें भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। समारोह का समापन गोरक्षा और गोसंवर्धन के संकल्प के साथ हुआ, जिसने उपस्थित जनमानस के हृदय में एक गहरी आध्यात्मिक छाप छोड़ी।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि इसने समाज में गोसेवा, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक एकता का सशक्त संदेश भी दिया। श्रीजड़खोर गोधाम में हुआ यह कार्यक्रम बृज की आध्यात्मिक विरासत और भारतीय संस्कृति की अनमोल धरोहर को पुनर्जीवित करने वाला साबित हुआ।

Ruturaj Ravan
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