मक्का और भुट्टे की फसलें पूरी तरह डूब गईं और किसानों की मेहनत नष्ट हो गई। बावजूद इसके, कई किसान बारिश के बीच भी फसल बचाने में जुटे दिखे

बेगूं। महज दो घंटे की मूसलधार बारिश ने इस क्षेत्र के किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। सुबह 8 बजे से 10 बजे के बीच हुई अचानक और तीव्र वर्षा ने क्षेत्र के सभी बांधों और कुओं को ओवरफ्लो कर दिया। इस दौरान कुल 901 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जिससे खेत जलमग्न हो गए और खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचा।

बारिश की तीव्रता इतनी अधिक थी कि खेतों में खड़ी और कटी हुई फसलें पानी में तैरती नजर आईं। मक्का और भुट्टे की फसलें पूरी तरह डूब गईं और किसानों की मेहनत नष्ट हो गई। बावजूद इसके, कई किसान बारिश के बीच भी फसल बचाने में जुटे दिखे, लेकिन स्थिति इतनी गंभीर थी कि खेतों में खड़े पानी से फसलों को नुकसान होने से नहीं रोक पाया।

किसानों का कहना है कि इस सीजन में औसत से अधिक बारिश के कारण मक्का, मूंगफली और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलें सड़ गई हैं। खेतों में जमा पानी सूख नहीं पा रहा है और इससे न केवल फसल की दुर्गंध फैल रही है, बल्कि कटाई-बचाव का कार्य भी कठिन होता जा रहा है। किसान लीला शंकर धाकड़ ने बताया कि उन्होंने 14 बीघा खेत में मक्का की फसल बोई थी, जिस पर बीज, खाद और मजदूरी सहित लगभग 1.25 लाख रुपये का खर्च आया। लेकिन अब न तो मक्का का चारा बचा और न ही एक दाना हाथ लगा। उन्होंने कहा कि बैंक की किस्तें चुकाना भी मुश्किल हो गया है।

किसानों ने सरकार से बीमा और मुआवजे की मांग तेज कर दी है। भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी भूरालाल धाकड़, मंडावरी के किसान लीला शंकर और चावंडिया के प्रधान जाट सहित अन्य किसानों ने अनुरोध किया है कि बीमा कंपनियों के माध्यम से फसल खराबी का उचित मुआवजा दिलाया जाए। उन्होंने प्रशासन से त्वरित राहत और सहायता की भी मांग की है।

मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में लगातार बारिश और धूप न निकलने की स्थिति ने समस्या और बढ़ा दी है। ऐसे हालात में फसलों को बचाने और कृषि कार्यों को सामान्य बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि वे स्थिति का आंकलन कर राहत प्रयासों को जल्द शुरू करेंगे, लेकिन किसानों की चिंताओं और आर्थिक नुकसान की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है।

यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों को किस तरह आर्थिक और मनोवैज्ञानिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। खेतों में खड़ी फसलें डूब जाने और फसलें बर्बाद होने से केवल किसान ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होती है। समय पर राहत, बीमा भुगतान और उचित मुआवजे के अभाव में छोटे और सीमांत किसान गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर सकते हैं।

बेगूं क्षेत्र के किसानों का कहना है कि अब प्रशासन और सरकार से उनकी मदद की आवश्यकता है, ताकि वे अपने कृषि कार्यों और परिवार की आजीविका को बचा सकें। इस बारिश ने न केवल खेतों को जलमग्न किया, बल्कि किसानों के लिए भविष्य की चिंता और भी गहरी कर दी है।

Updated On 20 Sept 2025 8:12 PM IST
Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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