टोंक में भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए 'विकसित भारत – जी राम जी' कानून का स्वागत किया है। पूर्व विधायक अजीत सिंह मेहता और जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि मनरेगा को बंद नहीं, बल्कि और अधिक सशक्त और डिजिटल बनाकर 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है। भ्रष्टाचार मुक्त ग्रामीण विकास और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर यह एक ऐतिहासिक कदम है।

टोंक। राजस्थान की सियासत में इन दिनों मनरेगा को लेकर घमासान मचा हुआ है, लेकिन टोंक की धरा से भाजपा ने कांग्रेस के विरोध पर जो पलटवार किया है, उसने ग्रामीण विकास की नई बहस छेड़ दी है। जहाँ एक ओर कांग्रेस मनरेगा में हुए बदलावों को लेकर सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रही है, वहीं भाजपा ने इसे भ्रम करार देते हुए 'विकसित भारत – जी राम जी' कानून के माध्यम से एक नए युग की शुरुआत बताया है। टोंक जिला मुख्यालय स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित एक भव्य प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह केवल नाम का बदलाव नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार मुक्त और जवाबदेह ग्रामीण भारत की आधारशिला है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और पूर्व विधायक अजीत सिंह मेहता ने कांग्रेस के आरोपों की धज्जियां उड़ाते हुए कहा कि विपक्षी दल जनता के बीच मनरेगा बंद होने का सफेद झूठ फैला रहा है। उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनरेगा की पुरानी कमियों, रिसाव और भ्रष्टाचार के छिद्रों को बंद कर अब इसे 'विकसित भारत – जी राम जी' कानून का स्वरूप दिया है। मेहता ने सवालिया लहजे में कांग्रेस को घेरते हुए पूछा कि आखिर उन्हें भगवान राम के नाम से इतनी आपत्ति क्यों है, जबकि आज पूरा देश इस नई योजना के लिए प्रधानमंत्री का अभिनंदन कर रहा है। यह योजना अब ग्रामीण गरीबों के लिए मात्र एक कल्याणकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके गौरव और सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी है।

भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह चौहान ने इस नए कानून की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए इसे ग्रामीण भारत के लिए 'स्वर्णिम अध्याय' करार दिया। उन्होंने बताया कि अब व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है, जिससे बिचौलियों का खेल खत्म हो जाएगा। इस कानून के तहत रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर 100 से 125 दिन कर दिया गया है। इतना ही नहीं, यदि किसी श्रमिक को आवेदन के 15 दिनों के भीतर काम नहीं मिलता है, तो उसे अनिवार्य रूप से बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। चौहान ने जोर देकर कहा कि यह कानून 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जहाँ जवाबदेही और पारदर्शिता ही शासन का मूल मंत्र है।

इस महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा के क्षेत्रीय नेतृत्व की एकजुटता भी दिखाई दी। मंच पर जिला उपाध्यक्ष रामचंद्र गुर्जर, पूर्व प्रधान ममता जाट, शीला मीणा, जगदीश गुर्जर और खेमराज मीणा जैसे कद्दावर नेता मौजूद रहे। साथ ही, मीडिया प्रभारी कमलेश यादव, बलवंत मराठा, शम्भू शर्मा, पार्षद मनीष सिसोदिया और राजेश मंगल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने जन-जागरण अभियान के माध्यम से इस योजना को घर-घर पहुँचाने का संकल्प लिया। टोंक से उठी यह आवाज अब प्रदेश की राजनीति में एक नई दिशा तय करने वाली साबित हो रही है, जहाँ विकास और संस्कृति का समन्वय एक नए कानून के रूप में जनता के सामने है।

Pratahkal Bureau

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