सूरसागर में हलचल थमी; दुकानों के शटर गिरे, शादियों पर भी पड़ा साया!
फलोदी की सड़क पर हाहाकार मचा है। इस एक ही हादसे ने पुरे सूरसागर को झकझोर दिया है। इस वारदात में कुल पंद्रह घरों की जिंदगिया तबाह हो गई है।

राजस्थान की धरती इन दिनों सड़क हादसों से कराह उठी है। बीते 24 घंटों में एक के बाद एक हुए हादसों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। जयपुर से लेकर जोधपुर और अलवर तक मौत ने सड़क पर कहर बरपा दिया। इन्हीं में सबसे दर्दनाक हादसा रविवार को जोधपुर के फलोदी इलाके के मतोड़ा में हुआ, जहां एक टेंपो ट्रैवलर और ट्रेलर की भीषण टक्कर में सूरसागर के पंद्रह श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई। चार लोग बुरी तरह घायल हैं।
ये सभी श्रद्धालु बीकानेर के कोलायत स्थित कपिल मुनि आश्रम से दर्शन कर लौट रहे थे। सड़क पर बिखरे शवों को देखकर प्रत्यक्षदर्शियों की रूह कांप गई। किसी के हाथ में चूड़ियां टूटी पड़ी थीं, तो किसी के बगल में टूटी थैली और बिखरे प्रसाद के फूल पड़े थे। सड़क पर पसरा सन्नाटा कई परिवारों की चीखें समेटे हुए था।
सूरसागर के नैनची बाग इलाके से निकली जब पंद्रह शवों की एक साथ यात्रा, तो पूरा जोधपुर थम गया। जिन गलियों में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ़ खामोशी है। सोमवार को जब 12 मृतकों का अंतिम संस्कार एक साथ हुआ, तो दृश्य देखकर हर आंख नम हो उठी। एक ही चिता में सास-बहू, बेटी और पोते की राख मिल गई और पीछे बस रह गया एक सूनापन, जो शब्दों से परे है।
मृतकों में दस महिलाएं, चार बच्चे और टेंपो ट्रैवलर चालक शामिल थे। एक ही परिवार के आठ सदस्य इस हादसे का शिकार बने। मोतीलाल सांखला का परिवार तो मानो उजड़ गया उनकी दो पुत्रवधुएं, पोते की बहू, और पौत्री सब एक साथ काल का ग्रास बन गईं। हादसे में गंभीर रूप से घायल उमेश की पत्नी गूंजना अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रही है।
छावरलाल सांखला की व्यथा सुन हर कोई द्रवित हो उठा। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ललिता और बेटी दिव्या रविवार सुबह घर से मंदिर दर्शन को निकली थीं। शाम करीब पांच बजे आखिरी बार फोन पर बात हुई थी दिव्या ने कहा था, “बस कुछ ही देर में घर पहुँचते हैं पापा...”। लेकिन कुछ ही घंटों बाद खबर आई कि दोनों अब कभी घर नहीं लौटेंगी। दिव्या की शादी को अभी आठ महीने भी नहीं हुए थे।
हादसे के बाद पूरे सूरसागर में मातम पसरा है। दुकानें बंद हैं, शादियाँ स्थगित कर दी गईं, गलियों में सन्नाटा है। लोग एक-दूसरे के घरों में चुपचाप बैठकर सांत्वना दे रहे हैं, पर शब्द किसी के पास नहीं हैं। सूरसागर की हवाओं में अब सिर्फ़ राख की गंध और अपनों को खोने का दर्द तैर रहा है।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
