झाड़ोल: कमलनाथ महादेव में महाराणा प्रताप काल की परंपरा के साथ होलिका दहन
आवरगढ़ की पहाड़ियों पर वानर टुक से शुरू हुई ऐतिहासिक होली की परंपरा, कमलनाथ महादेव मंदिर के पुजारियों ने क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि के लिए किया विधि-विधान से पूजन।

झाड़ोल में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कमलनाथ महादेव में श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ होलिका दहन संपन्न हुआ। इस अवसर पर निरंजन बाबा कमलनाथ, पुजारी ललित शर्मा, कमलेश शर्मा, मनीष पुजारी, मोहित देव, राधेश्याम पुजारी, रोहित देव एवं हिमांशु पुजारी सहित समस्त पुजारी परिवार की गौरवमयी उपस्थिति रही। पुजारी परिवार द्वारा शास्त्रोक्त विधि से पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों के सुख-समृद्धि की मंगल कामना की गई।
महाराणा प्रताप द्वारा रोपित ऐतिहासिक परंपरा
इस आयोजन की विशेष बात यह है कि झाड़ोल क्षेत्र में सर्वप्रथम होलिका दहन दमाणा ग्राम पंचायत स्थित आवरगढ़ की पहाड़ियों में वानर टुक पर किया जाता है। ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार "हल्दीघाटी युद्ध के पश्चात वर्ष 1577 में महाराणा प्रताप ने यहां होली जलाई थी।" तभी से यह गौरवशाली परंपरा अनवरत चली आ रही है कि संपूर्ण क्षेत्र में सबसे पहले इसी पावन स्थल पर होलिका दहन होता है।
क्षेत्र के लिए सांस्कृतिक संकेत का प्रतीक
परंपरा के अनुसार कमलनाथ महादेव मंदिर के पुजारी विधिवत होलिका दहन करते हैं, जिसके बाद ही समस्त झाड़ोल क्षेत्र में अन्य स्थानों पर होलिका दहन किया जाता है। पहाड़ी के उच्चतम शिखर पर जलाई गई इस होली की अग्नि की लौ करीब 15 किलोमीटर दूर तक स्थित गांवों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह प्रकाश पुंज न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि क्षेत्र की अटूट ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक भी है।

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