छोटीसादड़ी में बेखौफ खनन माफिया: प्रशासन की नाक के नीचे धरती का सीना छलनी, क्या सरकारी संरक्षण में फल-फूल रहा है अवैध कारोबार?
छोटीसादड़ी-मध्य प्रदेश सीमा पर खनन माफियाओं का आतंक चरम पर है। चारागाह, श्मशान और मंदिर की जमीनों पर अवैध खुदाई से सरकार को करोड़ों के राजस्व की चपत लग रही है, वहीं ओवरलोड डंपरों ने गांवों की सड़कों को खंडहर बना दिया है। प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठाते ग्रामीणों ने अब ड्रोन सर्वे और सख्त कार्रवाई की मांग की है। जानिए इस अवैध कारोबार की पूरी जमीनी हकीकत।

छोटीसादड़ी। राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमाओं पर स्थित छोटीसादड़ी क्षेत्र इन दिनों खनन माफियाओं की शरणस्थली बन चुका है। सीमावर्ती दर्जनों गांवों में कानून को ठेंगे पर रखकर अवैध खनन का खेल खुलेआम खेला जा रहा है। दिन के उजाले से लेकर रात के सन्नाटे तक, भारी-भरकम जेसीबी मशीनें और डंपर धरती की कोख को बेरहमी से छलनी कर रहे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि जिम्मेदार विभाग कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं। सरकार की ओर से खनन माफियाओं के विरुद्ध समय-समय पर 'जीरो टॉलरेंस' और सख्त अभियानों की घोषणाएं तो की जाती हैं, परंतु जमीनी हकीकत यह है कि यह तमाम कार्रवाई मात्र फाइलों और कागजों तक ही सिमटकर रह गई है।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण में बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिन स्वीकृत खदानों के नाम पर रॉयल्टी काटी जा रही है, वहां वास्तव में खनन के बजाय केवल पानी भरा हुआ है। माफिया चालाकी से अन्य प्रतिबंधित स्थानों पर अवैध खुदाई करते हैं और उसी खनिज को रॉयल्टी क्षेत्र का बताकर परिवहन कर रहे हैं। यह संगठित खेल न केवल पर्यावरण को नष्ट कर रहा है, बल्कि सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना भी लगा रहा है। माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्होंने न तो मूक पशुओं के लिए छोड़ी गई चारागाह भूमि की परवाह की, न ही मृतकों के विश्राम स्थल श्मशान भूमि और श्रद्धा के केंद्र मंदिरों की जमीन को बख्शा। सार्वजनिक रास्तों के किनारों तक को खोद डाला गया है, जिससे ग्रामीणों की आस्था, आजीविका और सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
इस पूरे अवैध तंत्र ने गांव की पक्की सड़कों को खदानों के गड्ढों में तब्दील कर दिया है। क्षमता से कई गुना अधिक वजन लेकर दौड़ने वाले ओवरलोड डंपरों ने सड़कों का वजूद ही खत्म कर दिया है। कई स्थानों पर इतने गहरे गड्ढे हो चुके हैं कि वहां हर समय बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। बरसात के दिनों में ये रास्ते दलदल बन जाते हैं, जिससे बीमार बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों का निकलना दूभर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि एंबुलेंस तक समय पर गांव नहीं पहुंच पाती है। परिवहन विभाग और पुलिस की उदासीनता का आलम यह है कि आंखों के सामने से गुजरते इन ओवरलोड वाहनों की न तो जांच होती है और न ही कभी चालान काटे जाते हैं।
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने प्रशासन पर 'लीपापोती' करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि खनन विभाग केवल औपचारिक निरीक्षण की औपचारिकता निभाकर लौट जाता है। अब तक न तो अवैध खनन स्थलों को सील किया गया और न ही किसी बड़े माफिया पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई हुई। कार्रवाई का अभाव सीधे तौर पर प्रशासनिक संरक्षण की ओर इशारा करता है। क्षेत्रवासियों ने अब पुरजोर मांग की है कि उच्चाधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप करें, ड्रोन कैमरों से अवैध खनन क्षेत्रों और तबाह हो चुकी सड़कों का निरीक्षण कराएं और पर्यावरण व राजस्व की रक्षा के लिए अपराधियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कदम उठाएं।

Pratahkal Bureau
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