प्रतापगढ़ के देवगढ़ में महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालय को भूमि आवंटन और नवीन भवन निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। 1950 से संचालित इस स्कूल को मर्ज करने की प्रक्रिया के विरोध में भारत आदिवासी पार्टी के नेताओं और ग्रामीणों ने प्रशासन को उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। जानिए क्या है पूरा मामला और ग्रामीणों की मुख्य मांगें।

प्रतापगढ़। शिक्षा के मंदिर को बचाने और नौनिहालों के भविष्य को सुरक्षित करने की गूंज अब जिला मुख्यालय तक पहुंच गई है। देवगढ़ स्थित महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय को भूमि आवंटन और नवीन भवन निर्माण की मांग को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। वर्षों पुराने इस संस्थान के अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा और प्रशासन के प्रति नाराजगी व्यक्त की है।

मामले की गंभीरता इस तथ्य से जुड़ी है कि देवगढ़ का यह विद्यालय भवन वर्ष 1950 से ग्राम पंचायत की आबादी भूमि पर संचालित हो रहा है। दशकों से शिक्षा की अलख जगाने वाले इस विद्यालय को अब अन्यत्र मर्ज करने की सुगबुगाहट शुरू हो गई है, जिसने ग्रामीणों के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है। ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि विद्यालय को मर्ज करने की प्रक्रिया न केवल बच्चों के लिए आवागमन की समस्या खड़ी करेगी, बल्कि जिस विद्यालय में इसे समाहित किया जा रहा है, वहां की शैक्षणिक व्यवस्था और संसाधन भी अत्यधिक दबाव के कारण प्रभावित होंगे। ग्रामीणों की मांग है कि वर्तमान स्थान पर ही भूमि का विधिवत पट्टा आवंटित कर नवीन भवन का निर्माण किया जाए ताकि बच्चों को स्थानीय स्तर पर ही सुगम शिक्षा मिल सके।

प्रशासन को सौंपे गए इस मांग पत्र में ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि भूमि आवंटन और भवन निर्माण की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो समस्त ग्राम पंचायत वासी लामबंद होकर उग्र आंदोलन की राह पकड़ेंगे। ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में कहा कि भविष्य में होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति की संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान भारत आदिवासी पार्टी के रानी देवली भील मंडल अध्यक्ष ओंकार डामोर, वार्डपंच प्रतिनिधि भीमराज निनामा, पूर्व वार्ड पंच रामलाल हरमोर, पूर्व वार्डपंच तेजपाल चौहान सहित कन्हैयालाल कलासुआ, लक्ष्मण नानूराम, राजमल निनामा, शंकर, पंकज और माधव कलासुआ जैसे प्रमुख व्यक्तियों के साथ भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। अब देखना यह है कि प्रशासन ग्रामीणों की इन जायज मांगों पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है।

Pratahkal Bureau

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