प्रतापगढ़ में शीतलहर और भीषण ठंड के प्रकोप को देखते हुए जिला कलेक्टर ने कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों के लिए 6 से 8 जनवरी 2026 तक अवकाश घोषित किया है। आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जारी इस आदेश में सभी निजी व सरकारी स्कूलों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। जानिए क्या हैं नियम और स्टाफ के लिए क्या हैं आदेश।

प्रतापगढ़। राजस्थान के सीमावर्ती जिले प्रतापगढ़ में इन दिनों कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने जनजीवन को पूरी तरह से अपनी आगोश में ले लिया है। आसमान से बरसती ओस और बर्फीली हवाओं के बीच नौनिहालों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने एक बड़ा निर्णय लिया है। प्रतापगढ़ जिला कलेक्टर ने आपदा प्रबंधन विभाग की एडवाइजरी का संज्ञान लेते हुए जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों के लिए आगामी तीन दिनों के अवकाश की घोषणा कर दी है। यह आदेश 6 जनवरी से 8 जनवरी 2026 तक प्रभावी रहेगा, ताकि स्कूली बच्चों को इस जानलेवा शीतघात (कोल्ड वेव) के प्रकोप से सुरक्षित रखा जा सके।

प्रशासन द्वारा जारी इस आदेश के पीछे मुख्य आधार राजस्थान सरकार के आपदा प्रबन्धन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग जयपुर द्वारा जारी दिशा-निर्देश और निदेशक प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान बीकानेर के कार्यालय से प्राप्त निर्देश हैं। जिले में तापमान में लगातार हो रही गिरावट और ठिठुरन के चलते यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था। जिला कलेक्टर के आदेशानुसार, यह अवकाश केवल विद्यार्थियों के लिए मान्य होगा। विद्यालय स्टाफ को इस दौरान कोई राहत नहीं दी गई है; उन्हें विभागीय निर्देशों के अनुसार विद्यालय में उपस्थित रहकर अपने आवश्यक प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों का संपादन करना होगा।

प्रशासन ने इस आदेश को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। जिले के समस्त राजकीय और गैर-राजकीय विद्यालयों के संस्था प्रधानों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि वे इन आदेशों की अक्षरशः पालना सुनिश्चित करें। यदि कोई भी शिक्षण संस्थान इस अवधि के दौरान पूर्व प्राथमिक से कक्षा 8 तक की कक्षाएं संचालित करता हुआ पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के विभिन्न प्रावधानों के तहत कठोर कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। आदेश में यह भी रेखांकित किया गया है कि सभी संस्था प्रधान जन समुदाय और विद्यार्थियों को शीतलहर से बचाने के लिए जारी की गई सुरक्षात्मक एडवायजरी का पूरी निष्ठा से पालन करेंगे।

कलेक्टर का यह निर्णय न केवल अभिभावकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, बल्कि वर्तमान मौसम की गंभीरता को भी दर्शाता है। जिले में बढ़ती ठंड और कोहरे की चादर ने जिस तरह से सामान्य गतिविधियों को प्रभावित किया है, उसे देखते हुए यह प्रशासनिक सक्रियता बच्चों की सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सबकी नजरें आगामी दिनों के मौसम और प्रशासन के अगले कदमों पर टिकी हैं।

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