आखिर क्यों SC ने टाली राम मंदिर चढ़ावा चोरी की सुनवाई? जानें क्या हुआ कोर्ट में
सर्वोच्च अदालत ने याचिका पर फौरन सुनवाई टालते हुए कहा कि इसमें जल्दबाजी की कोई वजह नहीं है, अब मामला 12 जुलाई के बाद सुना जाएगा।

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय गड़बड़ी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया है, वहीं पुलिस ने इस सिलसिले में आठ आरोपियों को हिरासत में लिया है।
Ram Mandir Donation Theftअयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला के चढ़ावे में कथित वित्तीय हेराफेरी और चोरी का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंच चुका है, जिसने पूरी धार्मिक और राजनीतिक सरगर्मी को तेज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले पर तुरंत सुनवाई करने से साफ इनकार करते हुए याचिकाकर्ता की जल्दबाजी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में फौरन सुनवाई की कोई ठोस वजह नजर नहीं आती, इसलिए अब कोर्ट खुलने के बाद यानी 12 जुलाई के बाद ही इस पर विचार किया जाएगा। सर्वोच्च अदालत के इस रुख ने जहां एक तरफ याचिकाकर्ताओं को झटका दिया है, वहीं दूसरी तरफ अयोध्या में इस पूरे मामले को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी बेहद आक्रामक हो गई है।
इस पूरे विवाद को कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका में मांग की गई है कि राम मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों की जांच के लिए सीबीआई की अगुवाई में एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया जाए। याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित मौजूदा एसआईटी की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाई है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार की एसआईटी ने बिना किसी औपचारिक एफआईआर या आपराधिक मामला दर्ज किए ही जांच शुरू कर दी, जो कानूनन संदेहास्पद है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि मामले के आरोप बेहद गंभीर हैं और यदि तुरंत सुनवाई नहीं हुई तो महत्वपूर्ण सबूतों के साथ छेड़छाड़ की प्रबल आशंका बनी हुई है।
इस बीच, अयोध्या से आ रही जमीनी खबरें इस मामले की गंभीरता को और बढ़ा रही हैं। जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान दर्ज कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर के चंदे में कथित गबन को लेकर पुलिस ने चंपत राय से लंबी पूछताछ की है, जबकि आने वाले दिनों में अनिल मिश्रा सहित ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी जांच के दायरे में शामिल कर उनके बयान दर्ज किए जा सकते हैं। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि प्रशासन पर लगे आरोपों के बीच जांच एजेंसियां किसी भी स्तर पर ढील देने के मूड में नहीं हैं।
दूसरी ओर, इस कथित गबन के मुख्य किरदारों पर भी कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। राम मंदिर में दान के रूप में आने वाली नकदी और कीमती सामानों की गिनती के काम में तैनात आठ आरोपियों—अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव—को कोर्ट ने पहले ही न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। सोमवार को इन सभी आरोपियों की अयोध्या कोर्ट में पेशी के दौरान पुलिस ने आगे की तफ्तीश के लिए उनकी रिमांड की मांग की है, ताकि इस पूरे रैकेट की तह तक पहुंचा जा सके।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले, चंपत राय से हुई पूछताछ और आठ कर्मचारियों की गिरफ्तारी ने इस पूरे मामले को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां आस्था, प्रशासन और कानून की मर्यादा दांव पर लगी है। उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप चुकी है, लेकिन अब सभी की नजरें 12 जुलाई के बाद सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि देश की सबसे बड़ी अदालत रामलला के दरबार में हुई इस कथित सेंधमारी और वित्तीय हेराफेरी के आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और इस पवित्र स्थल की शुचिता को बनाए रखने के लिए क्या आदेश जारी करती है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
