अमेठी की राजनीति में स्मृति ईरानी का निधि उपयोग ; आंकड़े, आलोचना और चुनावी परिदृश्य
स्मृति ईरानी ने अमेठी में 2019–2024 के बीच ₹9.8 करोड़ MPLADS निधि में से ₹8.07 करोड़ का प्रभावी उपयोग किया, 82% दर दर्ज की। उनके इस रिकॉर्ड ने प्रशंसा और बहस दोनों को जन्म दिया, जबकि 2024 चुनाव में उन्हें किशोरी लाल शर्मा से हार का सामना करना पड़ा।

स्मृति ईरानी
अमेठी की राजनीति में 2019 से 2024 तक स्मृति ईरानी की उपस्थिति न केवल चुनावी जीत के लिए बल्कि उनके संसदीय क्षेत्र विकास निधि (MPLADS) उपयोग के लिए भी चर्चा का विषय रही। राहुल गांधी को पराजित कर अमेठी की सीट जीतने के बाद, ईरानी ने इस अवधि में लगभग ₹9.8 करोड़ की एमपीएलएडीएस निधि की सिफारिश की और इसमें से ₹8.07 करोड़ का खर्च कर 82% की प्रभावी उपयोग दर दर्ज की, जो देश के कई सांसदों के आंकड़ों से काफी ऊपर थी।
समर्थकों ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर इसका जिक्र करते हुए डैशबोर्ड स्क्रीनशॉट साझा किए, ताकि उनके जमीनी स्तर पर काम की दृश्यमानता को उजागर किया जा सके। इस तरह की प्रशंसा, जो अक्सर राजनीतिक वंशवाद और पार्टी विवादों के बीच दुर्लभ होती है, के लिए ईरानी ने अपने समर्थकों का धन्यवाद भी किया।
हालांकि, आलोचकों ने नोट किया कि कुछ भुगतान बाहरी ठेकेदारों को किए गए, और कोई स्पष्ट भौतिक परियोजनाएं नजर नहीं आईं। यह बहस इसलिए भी तेज हुई क्योंकि 2024 के आम चुनाव में स्मृति ईरानी को किशोरी लाल शर्मा से लगभग 1.6 लाख वोटों से हार का सामना करना पड़ा। चुनावी हार के पीछे जातीय समीकरण, पार्टी भीतर तनाव और मतदाता प्राथमिकताओं जैसे कई कारण माने जा रहे हैं, जो केवल फंड उपयोग आंकड़ों से स्पष्ट नहीं होते।
एमपीएलएडीएस निधि का उपयोग सांसदों की प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय विकास पर उनकी प्रतिबद्धता का मापदंड माना जाता है। 2019–2024 के दौरान अमेठी में हुए निधि उपयोग ने न केवल सांसद की सक्रियता को दिखाया, बल्कि स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र भी बना। हालांकि, राजनीतिक समीकरण और क्षेत्रीय मतदाता दृष्टिकोण का महत्व इस आंकड़े से कहीं अधिक महत्वपूर्ण रहा।
अमेठी में स्मृति ईरानी का MPLADS रिकॉर्ड यह संकेत देता है कि निधियों का सही और प्रभावी उपयोग संभव है, भले ही चुनावी परिणाम हमेशा इसी प्रतिबद्धता से तय न हों। यह मामला भारतीय लोकतंत्र में संसदीय विकास निधियों की भूमिका, उनके प्रभाव और जनता की अपेक्षाओं के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से उजागर करता है।
अंततः, स्मृति ईरानी की अमेठी में निधि उपयोग की कहानी यह दर्शाती है कि संसदीय क्षेत्र विकास में प्रयासों की मान्यता और आलोचना दोनों ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। यह बहस केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि राजनीतिक वंशवाद, क्षेत्रीय मतदाता व्यवहार और पार्टी रणनीति जैसे व्यापक मुद्दों को भी सामने लाती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
