संसद सत्र के दौरान आम आदमी पार्टी ने बढ़ते प्रदूषण के मुद्दे पर जोरदार विरोध किया। AAP सांसदों ने सरकार से वायु प्रदूषण और जनस्वास्थ्य संकट पर तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की। इस प्रदर्शन से संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई और प्रदूषण पर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो गई।

संसद के मौजूदा सत्र के दौरान प्रदूषण के मुद्दे पर उस समय राजनीतिक तापमान बढ़ गया, जब आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसदों ने सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। बढ़ते वायु प्रदूषण, जहरीली हवा और उससे जुड़ी जनस्वास्थ्य समस्याओं को लेकर AAP ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया और सरकार से तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की। इस विरोध ने संसद की कार्यवाही के साथ-साथ राष्ट्रीय बहस को भी नई दिशा दे दी है।

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह के नेतृत्व में पार्टी सदस्यों ने संसद में प्रदूषण को “राष्ट्रीय आपातकाल” बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुँच चुकी है, लेकिन केंद्र सरकार की नीतियाँ ज़मीन पर असर नहीं दिखा पा रही हैं। विरोध के दौरान सांसदों ने मास्क पहनकर और तख्तियाँ दिखाकर अपनी बात रखी, जिससे संसद परिसर में कुछ देर के लिए असहज स्थिति बन गई।

AAP नेताओं ने इस मुद्दे को केवल दिल्ली तक सीमित न बताते हुए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में बढ़ते प्रदूषण का हवाला दिया। पार्टी का कहना था कि औद्योगिक उत्सर्जन, पराली जलाने, निर्माण कार्यों और वाहनों से निकलने वाले धुएँ पर नियंत्रण के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। आम आदमी पार्टी के अनुसार, प्रदूषण से जुड़ी नीतियाँ कागज़ों तक सीमित रह गई हैं और आम जनता इसकी कीमत अपने स्वास्थ्य से चुका रही है।

संसद के भीतर भी इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली। AAP सांसदों ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए बनाए गए कानूनों और योजनाओं का वास्तविक असर क्यों नहीं दिख रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट और पर्यावरण से जुड़ी संस्थाओं द्वारा समय-समय पर दिए गए निर्देशों का पालन पूरी गंभीरता से नहीं किया जा रहा।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सरकार की ओर से यह कहा गया कि प्रदूषण एक जटिल और बहुआयामी समस्या है, जिस पर लगातार काम किया जा रहा है। हालांकि, आम आदमी पार्टी ने इस जवाब को अपर्याप्त बताते हुए विरोध जारी रखा। संसद की कार्यवाही के दौरान शोर-शराबे के कारण कुछ समय के लिए कार्यवाही बाधित भी हुई, जिससे यह मुद्दा और अधिक सुर्खियों में आ गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आम आदमी पार्टी का यह विरोध ऐसे समय पर हुआ है, जब प्रदूषण को लेकर जन असंतोष लगातार बढ़ रहा है। सांस की बीमारियाँ, स्कूलों में अवकाश और अस्पतालों पर बढ़ता दबाव इस संकट की गंभीरता को उजागर कर रहे हैं। AAP ने यह संकेत दिया है कि वह आने वाले दिनों में भी इस मुद्दे को संसद और सड़कों दोनों पर उठाती रहेगी।

कुल मिलाकर, संसद सत्र के दौरान प्रदूषण पर आम आदमी पार्टी का यह विरोध केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश में पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़ी चिंता का प्रतिबिंब बनकर सामने आया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस विरोध के बाद सरकार प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कौन से ठोस कदम उठाती है और क्या संसद के भीतर उठी यह आवाज़ नीतिगत बदलाव का कारण बनती है।

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